Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची का ऐतिहासिक और धार्मिक गौरव, पहाड़ी मंदिर, इस समय अखाड़े में तब्दील हो गया है. रविवार को जब नई मंदिर समिति ने सत्ता की बागडोर संभालने की कोशिश की, तो वहां पहले से मौजूद पुरानी समिति और उनके समर्थकों ने ‘विद्रोह’ का झंडा बुलंद कर दिया. यह विवाद केवल कुर्सी का नहीं रह गया है, बल्कि इसमें ₹14 लाख के घोटाले की ऐसी एंट्री हुई है जिसने पूरे शहर के धार्मिक गलियारों में सनसनी मचा दी है.
हिसाब दो या गद्दी छोड़ो: घोटाले का गंभीर वार
विवाद की मुख्य जड़ में वह 14 लाख रुपये हैं, जिसका हिसाब अब तक अंधेरे में है. पुरानी समिति के सदस्यों ने सीधा और तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि वर्ष 2024 के दौरान मंदिर के कोष से इस भारी भरकम राशि की हेराफेरी की गई है. उनका दावा है कि उनके पास इस घोटाले के पुख्ता प्रमाण और दस्तावेज मौजूद हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नई समिति से जुड़े लोग इस राशि का जवाब देने के बजाय सत्ता के जोर पर प्रबंधन पर कब्जा करना चाहते हैं, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
साजिश और संसाधनों की लूट का आरोप
पुरानी समिति का दर्द यह है कि वे वर्षों से बिना किसी स्वार्थ के मंदिर की सेवा कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें एक सोची-समझी रणनीति के तहत बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है. समिति के सदस्यों ने खुलकर कहा कि “यह बदलाव सेवा के लिए नहीं, बल्कि मंदिर के संसाधनों की संगठित लूट के लिए किया गया है.” उनका आरोप है कि अनुभवी सेवादारों को हटाकर ऐसे लोगों को अंदर लाया जा रहा है जिनका मुख्य उद्देश्य धार्मिक सेवा नहीं, बल्कि मंदिर की आय पर नियंत्रण पाना है.

भैरव सिंह की सीधी चेतावनी: आंदोलन होगा उग्र
इस पूरे विरोध में हिंदू नेता भैरव सिंह के प्रवेश ने आग में घी का काम किया है. उन्होंने सीधे तौर पर नई समिति के राकेश सिन्हा और अन्य सदस्यों को ललकारते हुए कहा कि यह लड़ाई अब लंबी चलेगी. भैरव सिंह ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि “अभी हमारा विरोध लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण है, लेकिन अगर प्रशासन और नई समिति ने अपनी मनमानी बंद नहीं की, तो यह आंदोलन बेहद आक्रामक रूप अख्तियार कर लेगा.” उन्होंने साफ किया कि मंदिर की पवित्रता और प्रबंधन के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ का जवाब सड़कों पर दिया जाएगा.

राजनीति का अखाड़ा बनता आस्था का केंद्र
सबसे बड़ा सवाल मंदिर के ‘राजनीतीकरण’ पर उठ रहा है. प्रदर्शन कर रहे लोगों और स्थानीय भक्तों का कहना है कि पहाड़ी मंदिर जैसे पवित्र स्थल को राजनीति और पावर गेम से दूर रखा जाना चाहिए. आरोप लग रहे हैं कि राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर मंदिर समिति में अपने लोगों को फिट किया जा रहा है, जो श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है.
