Hazaribagh: समाज के अंतिम पायदान पर मौजूद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से ‘अर्थ एक प्रयास’ की टीम इचाक के भुसवा बिरहोर टोला पहुँची. यहाँ टीम ने न केवल मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए वस्त्र बांटे, बल्कि आदिवासी समुदाय की महिलाओं के बीच ‘मासिक धर्म स्वच्छता’ जैसे गंभीर विषय पर संवाद कर जागरूकता की नई मिसाल पेश की.
माहवारी स्वास्थ्य पर जागरूकता, कुरीतियों को तोड़ने की पहल
अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म को लेकर चुप्पी साधी जाती है, लेकिन संस्था के सदस्यों ने इस चुप्पी को तोड़ते हुए महिलाओं को विस्तार से जानकारी दी. जागरूकता सत्र के माध्यम से बताया गया कि इस दौरान बरती गई लापरवाही कैसे गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है. टीम ने महिलाओं की झिझक दूर करते हुए उन्हें सैनिटरी पैड के उपयोग और सुरक्षा मानकों के बारे में जागरूक किया.
हर महीने पैड देने का संकल्प, स्थायी समाधान की ओर कदम
केवल एक दिन की मदद के बजाय इसे स्थायी समाधान बनाने के लिए टीम ने घोषणा की कि वे हर माह इस टोले की महिलाओं को नियमित रूप से सेनेटरी पैड उपलब्ध कराएंगे. हजारीबाग और आसपास के दानदाताओं के सहयोग से प्राप्त पैड्स का वितरण कर महिलाओं को सुरक्षित जीवन जीने के लिए प्रेरित किया गया.
शिक्षा और स्वच्छता पर भी दिया गया जोर
वस्त्र वितरण के साथ-साथ टीम ने बिरहोर परिवारों को बच्चों की पढ़ाई के प्रति जागरूक किया. सदस्यों ने जोर देकर कहा कि शिक्षा ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे यह समुदाय गरीबी और अभाव से बाहर निकल सकता है. साथ ही पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की गई.
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स्थानीय प्रतिनिधियों और टीम की सक्रिय भागीदारी
इस सामाजिक अभियान को सफल बनाने में स्थानीय प्रतिनिधियों का भी भरपूर साथ मिला. मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता भास्कर उपाध्याय, पंचायत समिति प्रतिनिधि अजय राम, और वार्ड सदस्य नीतेश यादव मौजूद रहे. संस्था की ओर से पंकज बंसल, क्रांति, सिमरन, खुशबू, विकास, रवि, दीपा, श्रीकांत, राजश्री, रितेश, आकाश, राजन, धीरेन, राहुल, रोहित और अश्विनी सहित अन्य सदस्यों ने इस पुनीत कार्य में अपना सक्रिय श्रमदान किया.
