Palamu : पूर्व मंत्री कमलेश कुमार सिंह एवं भाजपा युवा नेता सूर्या सोनल सिंह ने आज पलामू प्रमंडल के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों युवाओं के साथ एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, इस दौरान झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) से मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषाओं को बाहर किए जाने के फैसले पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया गया.
युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़: कमलेश सिंह
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री कमलेश कुमार सिंह ने कहा कि यह निर्णय पलामू, गढ़वा और चतरा के युवाओं के साथ सीधा अन्याय है, उन्होंने सरकार से मांग की कि इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए, उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय भाषाओं को नजरअंदाज कर युवाओं के भविष्य को अधर में नहीं लटकाया जा सकता.
नीतिगत भेदभाव का आरोप: सूर्या सोनल सिंह
भाजपा युवा नेता सूर्या सोनल सिंह ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब राज्य में उड़िया, बांग्ला और उर्दू जैसी भाषाओं को स्थान मिल सकता है, तो पलामू प्रमंडल की प्रमुख भाषाओं को बाहर करना पूरी तरह से नीतिगत भेदभाव है, उन्होंने कहा कि हम किसी भाषा के विरोधी नहीं हैं, लेकिन सभी क्षेत्रों के युवाओं को समान अवसर मिलना चाहिए.
मुख्यमंत्री के बयान पर तीखा प्रहार
सूर्या सोनल सिंह ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उस कथित बयान पर भी कड़ी आपत्ति जताई जिसमें मगही, भोजपुरी और अंगिका बोलने वालों को झारखंडी मानने से इनकार किया गया था, उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “मुख्यमंत्री यह तय करने वाले कौन होते हैं कि कौन झारखंडी है और कौन नहीं? पलामू प्रमंडल का इतिहास और संस्कृति झारखंड की मिट्टी से जुड़ी है, हमारी पहचान और अस्मिता का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा”.
व्यापक जनआंदोलन का शंखनाद
दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से हेमंत सरकार को चेतावनी दी कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया, तो पूरे पलामू प्रमंडल में एक विशाल जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, उन्होंने कहा कि यह लड़ाई राजनीति की नहीं, बल्कि पलामू के युवाओं के अधिकार, सम्मान और उनके भविष्य की है, जिसे अंतिम अंजाम तक पहुँचाया जाएगा, प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सैकड़ों युवाओं ने भी सरकार के इस फैसले को क्षेत्रीय भेदभाव बताते हुए अपने हक के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया.
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