झारखंड कांग्रेसः गुटबाजी का गढ़ या राजनीतिक मजबूरी, सिर्फ सुर्खियां, सरोकार नहीं, अब अपनों बनाम अध्यक्ष की जंग

Ranchi: झारखंड कांग्रेस के लिए गुटबाजी कोई नई बात नहीं है. इससे पहले भी प्रदेश अध्यक्षों के खिलाफ विधायकों की लामबंदी और...

Ranchi: झारखंड कांग्रेस के लिए गुटबाजी कोई नई बात नहीं है. इससे पहले भी प्रदेश अध्यक्षों के खिलाफ विधायकों की लामबंदी और दिल्ली दरबार तक दौड़ लगाने की खबरें आती रही हैं. झारखंड में कांग्रेस के लिए अंदरूनी कलह नई बात नहीं है. बल्कि एक स्थायी साया बन चुका है. साल 2000 में राज्य गठन के बाद से ही झारखंड प्रदेश कांग्रेस में अध्यक्ष की कुर्सी हमेशा कांटों भरी रही है. झारखंड कांग्रेस के इतिहास में गुटबाजी के कई ऐसे मोड़ आए, जिन्होंने पार्टी की नींव हिला दी. लेकिन इस बार का संकट गहरा है.केशव महतो कमलेश को जब कमान सौंपी गई थी, तब उम्मीद थी कि वे सभी गुटों को साथ लेकर चलेंगे, लेकिन किशोर के बयान ने ऑल इज वेल के दावों की पोल खोल दी है.

क्या डैमेज कंट्रोल कर पाएगी कांग्रेस 

कांग्रेस के लिए आगे की राह कांटों भरी है. यदि आलाकमान ने जल्द ही हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह कलह अन्य विधायकों और मंत्रियों तक फैल सकती है. कांग्रेस कोटे के मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने फिलहाल सीधे तौर पर प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की कार्यशैली पर सवाल उठाकर पार्टी के भीतर मचे घमासान को सार्वजनिक कर दिया है. किशोर का संकेत स्पष्ट है कि अगर कांग्रेस को राज्य में अपनी जमीन बचानी है, तो उसे कागजी राजनीति से बाहर निकलकर सड़कों पर उतरना होगा.

कब-कब प्रदेश कांग्रेस को जूझना पड़ा अंदरूनी कलह से

• डॉ. अजय कुमारः पूर्व आईपीएस डॉ. अजय कुमार के कार्यकाल में विद्रोह चरम पर था. वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें बाहरी बताकर मोर्चा खोल दिया था. कलह इतनी बढ़ी कि 2019 लोकसभा चुनाव के बाद अजय कुमार को इस्तीफा देना पड़ा और उन्होंने तत्कालीन प्रदेश नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए.
• सुखदेव भगत का दौर: उनके कार्यकाल में भी संगठन दो फाड़ नजर आता था. टिकट वितरण से लेकर सांगठनिक नियुक्तियों तक, सुबोध कांत सहाय और अन्य दिग्गज गुटों के बीच अक्सर तकरार की खबरें दिल्ली दरबार तक पहुंचती थीं.
• राजेश ठाकुर का कार्यकाल : राजेश ठाकुर के अध्यक्ष बनते ही नाराज विधायकों का एक गुट सक्रिय हो गया. कई बार 4 से 5 विधायक दिल्ली में डेरा डाले नजर आए, जिन्होंने अपनी ही सरकार के मंत्रियों और प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए.
• केशव महतो कमलेश: वर्तमान में भी केशव महतो कमलेश के नेतृत्व के दौरान तालमेल की कमी और मंत्रियों की जवाबदेही को लेकर पार्टी के अंदर ही उपनेता राजेश कच्छप जैसे दिग्गज आवाज बुलंद कर चुके हैं. अब कांग्रेस कोटे के मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी मोरचा खोल दिया है.

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