Ranchi: राज्य सरकार ने अंत्योदय की परिकल्पना को साकार करने और प्रदेश से भुखमरी मिटाने के खाद्य सुरक्षा योजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और राज्य की अपनी विशिष्ट योजनाओं के माध्यम से करोड़ों लाभार्थियों तक सस्ता अनाज, कपड़े और पोषण पहुंचाने के लिए 2048 करोड़ रुपए खर्च करेगा. सरकार का मुख्य फोकस न केवल अनाज वितरण पर है, बल्कि सुदूर इलाकों में रहने वाले आदिम जनजातीय समूहों और उन गरीबों तक भी मदद पहुंचाना है, जो केंद्रीय कोटे से बाहर रह गए थे.
खाद्य सुरक्षा और अनाज वितरण: ‘जीरो हंगर’ का संकल्प
जो गरीब परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के दायरे में नहीं आ सके, उन्हें राहत देने के लिए ‘गैर-एनएफएसए’ अनाज वितरण योजना के तहत 560 करोड़ का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा, राज्य के लोगों को प्रोटीन युक्त आहार सुनिश्चित करने के लिए दाल वितरण योजना पर 600 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं.

वस्त्र सहायता और पोषण सुरक्षा
गरीब परिवारों की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए धोती-साड़ी वितरण योजना 600 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. वहीं, पोषण स्तर को सुधारने के लिए नमक वितरण योजना पर 120 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं. विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए ‘डाकिया योजना’ पर सात करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे.
बुनियादी ढांचा और किसानों को प्रोत्साहन
भविष्य की जरूरतों और अनाज के सुरक्षित भंडारण के लिए सरकार गोदाम निर्माण एवं नवीनीकरण पर 60 करोड़ निवेश कर रही है. साथ ही, किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने और सरकारी भंडारण बढ़ाने के लिए धान खरीद योजना पर 100 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई है.
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