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झाड़-फूंक और टोटकों के जाल में फंस रहे ग्रामीण, हजारीबाग में बढ़ता अंधविश्वास बना चिंता का विषय

Hazaribagh: जिले के सुदूरवर्ती गांवों में इन दिनों ओझा-गुनी, भगत-भगतीन और तथाकथित बाबाओं का प्रभाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है....

Hazaribagh: जिले के सुदूरवर्ती गांवों में इन दिनों ओझा-गुनी, भगत-भगतीन और तथाकथित बाबाओं का प्रभाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है. गांव-गांव में झाड़-फूंक और टोटके के नाम पर लोगों को भ्रमित करने का सिलसिला जारी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले के कई गांवों में ऐसे लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो अंधविश्वास फैलाकर भोले-भाले ग्रामीणों को अपने जाल में फंसा रहे हैं.

अज्ञानता का उठाया जा रहा फायदा

ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण आज भी कई लोग बीमारी, आर्थिक संकट, पारिवारिक विवाद या अन्य समस्याओं को “बुरी आत्मा”, “टोटका” या “जादू” से जोड़कर देखते हैं. इसी मानसिकता का फायदा उठाकर ओझा-गुनी और भगत-भगतीन लोगों को तरह-तरह के डर दिखाते हैं. झाड़-फूंक और कथित उपायों के नाम पर उनसे पैसे वसूले जाते हैं. कई मामलों में निर्दोष लोगों को “डायन” या “जादूगर” बताकर गांव में उनके खिलाफ माहौल बनाया जाता है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ने लगता है.

गांवों में बढ़ रहे विवाद और तनाव

ग्रामीणों का कहना है कि अंधविश्वास के कारण गांवों में आपसी विवाद और झगड़े भी बढ़ रहे हैं. छोटी-छोटी बातों को लेकर लोगों के बीच दुश्मनी हो जाती है और मामला थाना तक पहुंच जाता है. कई बार मारपीट, सामाजिक बहिष्कार और हिंसा जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं. इससे गांवों की शांति व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो रहा है.

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प्रशासन से कार्रवाई की मांग

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध लोगों ने इसे गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है. गरीब और अशिक्षित वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है, जो अपनी मेहनत की कमाई इन तथाकथित बाबाओं और ओझाओं के चक्कर में गंवा देते हैं.

जागरूकता अभियान चलाने की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. साथ ही गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को अंधविश्वास के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी जाए. सामाजिक विकास और शांति बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक सोच और जागरूकता को बढ़ावा देना जरूरी बताया जा रहा है.

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, जागरूकता और कानून का सख्ती से पालन ही इस तरह की कुरीतियों पर रोक लगाने का सबसे प्रभावी उपाय है. जब तक समाज खुद जागरूक नहीं होगा, तब तक अंधविश्वास और उससे जुड़ी सामाजिक समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं हो पाएगा.

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