Hazaribagh : विनोबा भावे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे में भले ही पिछले कुछ सालों में बड़े बदलाव हुए हों, लेकिन छात्रों की बुनियादी समस्याओं का अंत होता नहीं दिख रहा है. विश्वविद्यालय परिसर के कौटिल्य भवन में लगी लिफ्ट पिछले तीन वर्षों से सफेद हाथी साबित हो रही है, लाखों की लागत से लगी यह लिफ्ट तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी है, जिससे सबसे ज्यादा परेशानी दिव्यांग छात्र-छात्राओं और बुजुर्गों को हो रही है, वे आज भी चौथी मंजिल तक जाने के लिए सीढ़ियों का सहारा लेने को मजबूर हैं.
सिर्फ लिफ्ट ही नहीं, जनरेटर भी जवाब दे चुके हैं

विश्वविद्यालय की बदहाली का आलम केवल लिफ्ट तक सीमित नहीं है, परिसर में रखे जनरेटर भी बिजली कटते ही मौन हो जाते हैं, नतीजा यह होता है कि लाइट जाते ही न केवल पढ़ाई बाधित होती है, बल्कि कैंपस में पानी की किल्लत भी शुरू हो जाती है, शौचालयों में पानी न होने और उनकी नियमित सफाई न होने के कारण वहां से उठने वाली दुर्गंध ने छात्रों का जीना मुहाल कर दिया है, खासकर सम्राट भवन के पास की स्थिति इतनी खराब है कि वहां से गुजरना भी मुश्किल हो गया है.
अधिकारियों की अनदेखी और छात्रों का डर
हैरानी की बात यह है कि हर रोज इसी रास्ते से बड़े अधिकारी गुजरते हैं, लेकिन किसी का ध्यान इन मूलभूत समस्याओं की ओर नहीं जाता. छात्र इस डर से आवाज नहीं उठाते कि कहीं प्रशासन की नाराजगी उनके भविष्य पर भारी न पड़ जाए, कई विभागों ने लिखित शिकायतें भी की हैं, लेकिन मरम्मत के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं, विश्वविद्यालय प्रशासन को अब कुंभकर्णी नींद से जागकर इन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की जरूरत है.
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