घर-गाड़ी खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर! क्या है 30% EMI नियम?

Newswave Desk: हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना घर हो, अपनी गाड़ी हो. इन सपनों को पूरा करने के...

Newswave Desk: हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना घर हो, अपनी गाड़ी हो. इन सपनों को पूरा करने के लिए बैंक आसानी से लोन भी दे देते हैं. लेकिन सवाल ये है कि आपकी सैलरी का कितना हिस्सा EMI में जाना चाहिए ताकि आपकी लाइफस्टाइल और बचत दोनों प्रभावित न हों?

बचत के साथ-साथ आपकी ज़रूरतें भी पूरी होंगी

30% EMI के नियम के अनुसार, आपके सभी लोन की कुल EMI आपके प्रीत माह की सैलरी 30% से अधिक होनी चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि घर या कार खरीदते समय जब आप लोन लेते हैं, तो बैंक आपसे आपकी इनकम पूछता है, जिसके आधार पर आपको 40-50% तक लोग दी जाती है. लेकिन वित्तीय स्थिरता और भविष्य की स्थिरता ध्यान रखते हुए एक्सपर्ट्स 30% रूल को ही अपनाने को कहते है. बता दें, इस फार्मूला में होम लोन से लेकर कार लोन, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड EMI ये सारी चीजें शामिल होती है. इसे इस तरह से सोचें: अगर आपकी सैलरी ₹1,00,000 है, तो30% के नियम के आधार पर 30,000 तक की रकम EMI के लिए रखी जानी चाहिए.बाकी 70% रकम घर के खर्चों को पूरा करने और एक इमरजेंसी फंड बनाने के लिए अलग रखनी चाहिए. चलिए जानते है इस नियम के फायदे.

जानिए 30% EMI के फायदे

  • इससे यह पक्का हो जाता है कि नौकरी जाने या किसी इमरजेंसी की स्थिति में भी, आपके पास अपनी EMI चुकाने के लिए काफ़ी पैसे हों.
  • अपनी EMI पर एक लिमिट तय करने से समय पर पेमेंट होना पक्का होता है, जिसका असर आपके CIBIL स्कोर पर भी दिखेगा.
  • अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है और आपका कर्ज़-से-आमदनी का अनुपात (debt-to-income ratio) कम है, तो बैंक आपको आसानी से लोन दे देंगे.
  • इसके अलावा, यह फ़ॉर्मूला आपके निवेश पर कोई बुरा असर नहीं डालता, जिससे समय के साथ आप आर्थिक रूप से और भी मज़बूत बनते जाते हैं.

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