AI बना रहा है दिमाग को कमजोर? नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा, 10 मिनट में बदलने लगी सोचने की आदत

News Wave Dask : आज की डिजिटल दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है....

News Wave Dask : आज की डिजिटल दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. ईमेल लिखने से लेकर होमवर्क, ऑफिस प्रोजेक्ट और रोजमर्रा के सवालों तक लोग तेजी से AI टूल्स का सहारा ले रहे हैं. ChatGPT, Claude और Gemini जैसे AI चैटबॉट कुछ ही सेकंड में जवाब देकर लोगों का समय और मेहनत बचा रहे हैं. लेकिन अब एक नई रिसर्च ने AI के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जताई है. स्टडी के अनुसार, अगर इंसान हर छोटी चीज के लिए AI पर निर्भर होने लगे तो उसकी खुद सोचने, समझने और समस्याओं को हल करने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकती है.

AI की आदत बनी कमजोरी

रिसर्च में 1,222 लोगों को शामिल किया गया. जिन्हें मैथ्स और रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन से जुड़े सवाल दिए गए. कुछ प्रतिभागियों को AI की मदद लेने की अनुमति दी गई, जबकि बाकी लोगों ने बिना किसी AI सपोर्ट के सवाल हल किए. शुरुआत में AI इस्तेमाल करने वाले प्रतिभागियों का प्रदर्शन बेहतर रहा, उन्होंने सवाल जल्दी हल किए और ज्यादा स्कोर भी हासिल किए.लेकिन जब रिसर्चर्स ने अचानक AI की सुविधा हटा दी, तब बड़ा अंतर सामने आया. बिना AI वाले प्रतिभागियों ने मैथ्स टेस्ट में करीब 73 प्रतिशत सवाल सही हल किए.जबकि AI पर निर्भर रहने वाले लोग केवल लगभग 57 प्रतिशत तक ही पहुंच पाएं. पढ़ने समझने वाले टेस्ट में भी यही पैटर्न देखने को मिला.

असली समस्या AI नहीं, बल्कि उस पर बढ़ती इंसानी निर्भरता है

रिसर्चर्स के मुताबिक सबसे ज्यादा असर लोगों की “Persistence” यानी लगातार कोशिश करने की आदत पर पड़ा. AI इस्तेमाल करने वाले लोग कठिन सवालों को जल्दी छोड़ने लगे. स्टडी में दावा किया गया कि सिर्फ 10 मिनट तक AI पर निर्भर रहने के बाद भी लोग बिना AI के जल्दी हार मानने लगे. रिसर्चर्स ने इसे “Boiling Frog Effect” से जोड़ा. जिसमें बदलाव धीरे धीरे होता है और इंसान को तुरंत महसूस भी नहीं होता.
हालांकि रिसर्च में एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया. जिन लोगों ने AI से सीधे जवाब लेने के बजाय केवल हिंट, गाइडेंस या समझने में मदद ली, उन पर नकारात्मक असर काफी कम देखा गया. यानी AI अगर “टीचर” की तरह इस्तेमाल हो तो वह सीखने में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन हर काम का तैयार जवाब लेने की आदत दिमाग को शॉर्टकट्स का आदी बना सकती है. स्टडी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि असली समस्या AI नहीं, बल्कि उस पर बढ़ती इंसानी निर्भरता है. AI समय बचाने और सीखने का मजबूत माध्यम बन सकता है. अगर इंसान खुद सोचने और संघर्ष करने की आदत छोड़ दे, तो लंबे समय में उसकी मानसिक क्षमता प्रभावित हो सकती है.

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