रांची: प्रशासन की चेतावनी के बाद भी निजी स्कूलों की मनमानी जारी, हर साल फीस बढ़ाकर अभिभावकों पर बढ़ा रहे बोझ

Ranchi: राजधानी रांची में निजी स्कूलों की लगातार बढ़ती फीस को लेकर अब जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया...

Ranchi: राजधानी रांची में निजी स्कूलों की लगातार बढ़ती फीस को लेकर अब जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है. बावजूद इसके कई निजी स्कूल प्रशासन की चेतावनियों और नियमों को नजरअंदाज कर अपनी मनमानी पर उतारू हैं. हर साल फीस बढ़ोतरी कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार बार-बार फीस बढ़ाना उचित नहीं माना गया है. इसी मुद्दे को लेकर उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने सीबीएसई, आईसीएसई और जैक बोर्ड से संबद्ध निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. बैठक में उपायुक्त ने साफ तौर पर नाराजगी जताते हुए कहा कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, इसे व्यवसाय बनाना गलत है. उन्होंने कहा कि आरटीई नियमों के तहत दो वर्षों में फीस वृद्धि का प्रावधान है, लेकिन कई स्कूल हर साल फीस बढ़ाकर अभिभावकों की जेब पर सीधा असर डाल रहे हैं.

यह भी पढ़ें: चाईबासा: गुवा सेल खदान में करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप, गीता कोड़ा ने उठाई उच्चस्तरीय जांच की मांग

उपायुक्त ने लगाई फटकार

उपायुक्त ने उन स्कूलों को कड़ी फटकार लगाई जो लगातार फीस में बढ़ोतरी कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि अनावश्यक और अत्यधिक फीस वृद्धि पर तत्काल रोक लगाई जाए. साथ ही यह भी कहा गया कि स्कूल प्रशासन अभिभावकों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर निर्णय लें. बैठक में कई स्कूलों के प्रधानाचार्यों की अनुपस्थिति को भी प्रशासन ने गंभीरता से लिया. उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अनुपस्थित रहने वाले विद्यालयों को शो-कॉज नोटिस जारी किया जाए. इससे साफ संकेत मिल रहा है कि जिला प्रशासन अब इस मामले में केवल चेतावनी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि कार्रवाई की तैयारी में है.

यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार और झारखंड के DGP को दिया ये निर्देश

आर्थिक बोझ से अभिभावक परेशान

रांची में पिछले कुछ वर्षों से अभिभावक लगातार स्कूल फीस, वार्षिक शुल्क, डेवलपमेंट फीस और अन्य अतिरिक्त चार्ज को लेकर विरोध जताते रहे हैं. कई अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल हर साल नए नाम पर शुल्क बढ़ा देते हैं, जबकि सुविधाओं में कोई खास सुधार नहीं होता. प्रशासन की बार-बार की चेतावनी के बावजूद निजी स्कूलों की मनमानी जारी रहने से अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. अब जिला प्रशासन सभी निजी स्कूलों की फीस संरचना, बढ़ोतरी के नियम और शुल्क निर्धारण प्रक्रिया की समीक्षा कर सकता है. यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित स्कूलों पर कार्रवाई भी हो सकती है. प्रशासन की इस सख्ती के बाद अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या निजी स्कूल अब भी अपनी मनमानी बंद करेंगे या फिर नियमों को नजरअंदाज करते रहेंगे.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *