झारखंड पुलिस: 32 साल की सेवा, सालभर का इंतज़ार और ‘रिटायरमेंट’ वाली पोस्टिंग!

इस महीने नव प्रोन्नत डीएसपी में दो और हो जाएंगे सेवानिवृत, 6 हो चुके है सेवानिवृत Ranchi: झारखंड पुलिस के 64...

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 इस महीने नव प्रोन्नत डीएसपी में दो और हो जाएंगे सेवानिवृत, 6 हो चुके है सेवानिवृत

Ranchi: झारखंड पुलिस के 64 इंस्पेक्टरों के लिए प्रमोशन खुशियों के बजाय चिंता सबब बन गया है. पिछले साल जून में डीएसपी बनाए गए अफसरों को सालभर बाद भी नई जिम्मेदारी (पोस्टिंग) नहीं मिली. नतीजा यह है कि एक-एक कर अफसर बिना कुर्सी संभाले ही रिटायर हो रहे हैं. 32 साल तक खाकी की सेवा करने के बाद इन अफसरों को अपने हक के लिए सिस्टम की फाइलों से लड़ना पड़ रहा है.

इस महीने दो और हो जाएंगे सेवानिवृत्त: बिना पदभार संभाले विदाई का डर

प्रमोशन पाकर पोस्टिंग का इंतजार कर रहे 58 अफसरों की धड़कनें तेज हैं. इस फेहरिस्त में शामिल दो और नव प्रोन्नत डीएसपी– अजय कुमार और सुधीर प्रसाद साहू– इसी महीने 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं. इन्हें भी अब यही डर सता रहा है कि क्या इन्हें भी रिटायरमेंट से चंद घंटे पहले कागजों पर पोस्टिंग दी जाएगी.

यह विडंबना ही है कि जिस पद के लिए पूरी सेवा लगा दी, उस पद पर काम करने का मौका मिलने से पहले ही रिटायरमेंट की तारीख नजदीक आ गई है.

अजीब परंपरा: कल रिटायरमेंट, आज मिली पोस्टिंग

विभागीय उदासीनता की इंतहा देखिए— अब तक प्रमोट हुए 64 अफसरों में से 6 रिटायर हो चुके हैं. इनमें से दो की विदाई तो किसी मजाक से कम नहीं रही. उन्हें रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले विशेष शाखा में पदस्थापित किया गया.

संयोग देखिए कि जिस दिन पोस्टिंग हुई, उसके अगले दिन शनिवार था. वे अपने नए कार्यालय की दहलीज तक नहीं पहुंच सके और ‘डीएसपी’ की नेमप्लेट लगने से पहले ही सेवा का सूरज ढल गया.

32 साल की तपस्या और एक साल का वनवास

  • 25 जून 2025: को सरकार ने 64 इंस्पेक्टरों को डीएसपी पद पर प्रोन्नति दी थी.
  • 01 साल: बीत जाने के बाद भी इन अफसरों को फील्ड में तैनाती नहीं दी गई.
  • 06 अफसर: अब तक बिना डीएसपी की कमान संभाले रिटायर हो चुके हैं.
  • 58 अफसर: अब भी ‘वेटिंग फॉर पोस्टिंग’ की कतार में खड़े होकर सरकार की ओर देख रहे हैं.

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आर्थिक लाभ का ‘झुनझुना’ और अफसरों का रोष

पुलिस महकमे के गलियारों में चर्चा है कि सरकार रिटायरमेंट से ठीक पहले पोस्टिंग का ‘खेल’ इसलिए करती है ताकि अफसरों को तकनीकी रूप से डीएसपी पद का आर्थिक और पेंशन लाभ मिल सके. लेकिन अफसरों का तर्क है कि सम्मान सिर्फ पैसों में नहीं, उस पद की गरिमा और जिम्मेदारी को निभाने में है. सरकार की इस उदासीनता की वजह से पुलिस महकमे में भारी रोष है.

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