Hazaribagh : विकास के ऊंचे दावों और चमकती फाइलों के बीच विष्णुगढ़ प्रखंड की खरना पंचायत का चुनर मांडू गांव आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है, आधुनिकता के इस दौर में भी यहां के ग्रामीण एक अदद पुल की बाट जोह रहे हैं, गांव के बीच से गुजरने वाली सगधोवा नदी मानसून आते ही ग्रामीणों के लिए काल बन जाती है, जिससे पूरा गांव बाकी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है.
जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी

गर्मी के दिनों में शांत दिखने वाली यह नदी पहली बारिश के साथ ही अपना विकराल रूप धारण कर लेती है, नदी पर पुल न होने के कारण ग्रामीणों को अपनी जान हथेली पर रखकर पानी के तेज बहाव के बीच से गुजरना पड़ता है, सबसे बुरा हाल स्कूली बच्चों और शिक्षकों का होता है, जलस्तर बढ़ने के कारण बच्चे महीनों तक स्कूल नहीं जा पाते, वहीं शिक्षकों के लिए भी विद्यालय पहुंचना नामुमकिन हो जाता है.
बीमारी में बढ़ जाती है मुसीबत, प्रशासन मौन
ग्रामीणों का दर्द है कि बरसात के दिनों में गांव एक टापू की तरह बन जाता है, अगर कोई बीमार पड़ जाए, तो उसे अस्पताल तक ले जाना एक बड़ी चुनौती बन जाती है, स्थानीय लोगों के मुताबिक अब तक विधायक, सांसद और कई प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन दिए जा चुके हैं.
फर्जी दिलासा
हर बार चुनाव के समय पुल निर्माण का वादा किया जाता है, लेकिन चुनाव बीतते ही फाइलें धूल फांकने लगती हैं.
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
ग्रामीण आज भी खुद को मूलभूत सुविधाओं से वंचित महसूस कर रहे हैं.
ग्रामीणों ने फिर बुलंद की मांग
चुनर मांडू के ग्रामीणों ने एक बार फिर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है कि सगधोवा नदी पर जल्द से जल्द पुल का निर्माण कराया जाए, ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल उनके लिए केवल आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि उनके बच्चों के बेहतर भविष्य और गांव के विकास की जीवन रेखा है.
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