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झारखंड में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर भाजपा का हेमंत सरकार पर हमला

– एनसीआरबी आंकड़ों का हवाला देते हुए भाजपा ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल – 39 प्रशिक्षित डीएसपी की अब...

– एनसीआरबी आंकड़ों का हवाला देते हुए भाजपा ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
– 39 प्रशिक्षित डीएसपी की अब तक पोस्टिंग नहीं होने पर सरकार को घेरा

Ranchi: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड की कानून व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में झारखंड अपराध और प्रशासनिक अव्यवस्था का केंद्र बनता जा रहा है. प्रतुल शाहदेव ने कहा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के वर्ष 2024 के आंकड़े राज्य की भयावह स्थिति को दर्शाते हैं. उनके अनुसार प्रति लाख आबादी पर हत्या के मामलों में झारखंड देश में शीर्ष पर पहुंच गया है. उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 में राज्य में 1472 हत्याएं दर्ज हुईं और हत्या का अनुपात 3.7 प्रति लाख आबादी रहा, जबकि राष्ट्रीय औसत 1.9 है.

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जनसंख्या अनुपात में झारखंड अधिक असुरक्षित

उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल अक्सर अन्य राज्यों का उदाहरण देकर झारखंड की स्थिति को सामान्य बताने की कोशिश करते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि जनसंख्या के अनुपात में झारखंड अधिक असुरक्षित होता जा रहा है. भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पिछले साढ़े छह वर्षों में राज्य में हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लगातार वृद्धि हुई है. प्रतुल शाहदेव ने कहा कि राज्य की जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है और अपराधियों में कानून का डर खत्म होता नजर आ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपराध नियंत्रण के बजाय प्रशासनिक व्यवस्थाओं और ट्रांसफर-पोस्टिंग में उलझी हुई है.

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ढाई साल से पोस्टिंग का इंतजार कर रहे 39 डीएसपी

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब होने के बावजूद अक्टूबर 2023 में प्रशिक्षण पूरा कर चुके 39 डीएसपी अब तक पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों की नियुक्ति जुलाई 2022 में हुई थी, लेकिन प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद भी उन्हें जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई. प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि सरकार इन अधिकारियों के वेतन और भत्तों पर करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है, लेकिन उन्हें तैनात नहीं किया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य में अपराध बढ़ रहे हैं, तब प्रशिक्षित अधिकारियों को आखिर क्यों बैठाकर रखा गया है?

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