Hazaribagh : विनोबा भावे विश्वविद्यालय में शह और मात के खेल में लोकभवन को भी शामिल कर लिया गया है, विभावि में जो मजबूत है, उसकी सुनी जाती है, भले वह वैध हो या अवैध, कुलपति और रजिस्ट्रार के बीच चल रहे विवाद में महिला रजिस्ट्रार प्रणिता को लोकभवन ने हटा दिया और इसकी कई सारी वजह रही, लेकिन उनके स्थान पर जिन्हें प्रभारी रजिस्ट्रार बनाया गया, उसमें भी सीनियर सब रजिस्ट्रार वन आदिवासी (ट्राइबल) अनिल कुमार उंराव के वरीयता की अनदेखी करके सब रजिस्ट्रार टू कुमार विकास को प्रभारी रजिस्ट्रार बना दिया गया.
प्रो. प्रणिता को उनके पद से हटाया

लोकभवन ने छह माह में अपने द्वारा विभावि रजिस्ट्रार बनाये गए प्रो. प्रणिता को उनके पद से हटा दिया, इसके पीछे की वजह कुलपति और रजिस्ट्रार के बीच चल रहा विवाद और खींचतान रहा, जिसमें बताया जा रहा है कि पठन पाठन का काम प्रभावित होने लगा था. अनुबंधवाले शिक्षकों के अनुबंध विस्तार के फाइल, वेतन आदि के फाइल, परीक्षा शोध आदि के फाइल वीसी के अनुमोदन के बाद रूकने लगे और इसकी शिकायत राजभवन पहुंचने लगी, इसके अलावे कई शिक्षकों ने अपने साथ किये जा रहे व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाने शुरू किये, बताया जा रहा है कि वीसी बनाम रजिस्ट्रार के विवाद में उनके खिलाफ शिकायत हर दिन करायी गयी और वहां ऐसा मोटा पुलिंदा जमा करा दिया गया, जिसमें उन्हें बोल्ड करवा दिया गया, वैसे अच्छी बात उनके छोटी सी अवधि की यह भी रही कि फाइलों पर आंख मूंदकर उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए, जिससे विवि में सक्रिय गैंग की मंशा पूरी होने में अवरोध आने लगे थे. सालों से जमे कई घाघ कर्मचारियों पर कार्रवाई और मामला बाहर लाने पर उसी दिन से रजिस्ट्रार को टारगेट बना लिया गया था.
जेपीएससी से विभावि रजिस्ट्रार के लिये चयनित को बाहर का रास्ता दिखाकर प्रभार से ले रहे हैं काम
विनोबा भावे विश्वविद्यालय की आज जो स्थिति है, उसमें लोकभवन भी कम जिम्मेवार नहीं है, अपने ही निर्देशों की धज्जियां लोकभवन ने उड़ायी है, हर दृष्टि से योग्य और सीनियर उपर से ट्राइबल सब रजिस्ट्रार वन की अनदेखी कर सब रजिस्ट्रार टू को प्रभारी रजिस्ट्रार बना दिया, वैसे भी कई जूनियर यहां सीनियर से उपर पद पर हैं और जूनियर उनके नीचे, और यही सब वजहें हैं, जिस कारण उसपर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं. सबसे बड़ी बात दो साल पहले बिमल कुमार मिश्रा का जेपीएससी से स्थायी रजिस्ट्रार में नियुक्ति हुई थी, पर एक साजिश के तहत कमीशन रजिस्ट्रार को रोक दिया गया, उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्र के नाम पर जांच कमेटी बनाकर जो खेल हुआ, उसमें आज भी उनके मामले में पेंच लगा हुआ है, वे आज प्राचार्य के पद पर हैं और उनके नाम कई सारी उपलब्धियां हैं, जो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्रदान कर रही है, लेकिन उनसे अदावत में उन्हें आने से रोककर अपने मनोनुकू ल अधिकारी की तलाश में विभावि को प्रभारवाले अधिकारी की प्रयोगशाला बना दी गयी है, दो साल में प्रो. कौशलेन्द्र, एम आलम, सादिक रज्जाक, कुमार विकास, प्रणिता और अब फिर कुमार विकास को प्रभारी रजिस्ट्रार का दायित्व सौंपा गया.
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