Tamad: बदलते दौर में जहां आधुनिकता की दौड़ में समाज अपनी जड़ों से दूर होता जा रहा है, वहीं तमाड़ में रविवार को एक ऐसी सामाजिक बैठक आयोजित हुई, जिसने लोगों को अपनी संस्कृति, भाषा और सामाजिक जिम्मेदारियों की याद दिला दी. तमाड़ स्थित मां होटल में आयोजित इस विशेष सामाजिक बैठक में क्षेत्र के सम्मानित अगुवाई करने वाले बन्धु, समाजसेवी, बुद्धिजीवी और विभिन्न गांवों से पहुंचे गणमान्य लोग एक मंच पर जुटे. बैठक केवल चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज को एकजुट और जागरूक बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण संकल्प भी लिए गए.
हर महीने आयोजित की जाएगी बैठक
बैठक का मुख्य केंद्र रहा आदिवासी संस्कृति, परंपरा, हासा-भाषा और सामाजिक एकता को अक्षुण्ण बनाए रखना. वक्ताओं ने कहा कि समाज की असली पहचान उसकी संस्कृति और भाषा से होती है, इसलिए आने वाली पीढ़ियों तक इसे सुरक्षित पहुंचाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है. बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब प्रत्येक माह अलग-अलग स्थानों पर इस तरह की सामाजिक बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि गांव-गांव तक सामाजिक जागरूकता का संदेश पहुंच सके और समाज को संगठित करने का कार्य लगातार जारी रहे. कार्यक्रम में युवाओं, युवतियों और महिलाओं की भागीदारी को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताया गया. वक्ताओं ने कहा कि जब युवा और महिलाएं आगे आएंगी, तभी समाज में फैली कुरीतियों, नशाखोरी, सामाजिक बुराइयों और आपसी विभाजन को खत्म किया जा सकेगा.

बैठक में नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा, स्वच्छ वातावरण, सामाजिक समरसता और समानता पर आधारित समाज निर्माण को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई. लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ विकास की बातें करने से समाज आगे नहीं बढ़ेगा, बल्कि सामाजिक चेतना, आपसी सहयोग और संस्कारों को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है. बैठक के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने समाज की एकजुटता, सामाजिक उत्थान और सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने के लिए निरंतर कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया.
“एकता की यह मशाल अब गांव-गांव जलेगी”
तमाड़ की यह बैठक केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने की एक नई पहल बनकर उभरी. लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह समाज के लोग एक मंच पर आते रहे, तो आने वाले समय में सामाजिक बदलाव की एक नई मिसाल कायम होगी.
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