रांची: बजट सत्र के आठवें दिन ग्रामीण विकास विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान विधायक हेमलाल मुर्मू ने अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि बिलो टेंडर का प्रचलन बढ़ता जा रहा है, जो 25 से 35 प्रतिशत तक नीचे जा रहा है. इससे कार्यों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. उन्होंने प्रश्न उठाया कि इतने कम दर पर गुणवत्तापूर्ण कार्य कैसे संभव होगा. इस प्रवृत्ति को तत्काल रोका जाना चाहिए तथा नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाने की जरूरत है.

पदस्थापन और लंबित टेंडर का मुद्दा
हेमलाल मुर्मू ने कहा कि अधीक्षण अभियंता को चीफ इंजीनियर का कार्य दिया जा रहा है, जो उचित नहीं है। सक्षम पदाधिकारी का विधिवत पदस्थापन होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 का टेंडर अब तक निष्पादित नहीं हुआ है. मंत्री को इस दिशा में ठोस और साहसिक (बोल्ड) निर्णय लेने की आवश्यकता है.
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SIR में प्रमाण पत्र की मांग पर आपत्ति
उन्होंने कहा कि SIR में आदिवासियों से आदिवासी होने का प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है, जो गंभीर विषय है. उन्होंने कहा कि “हेमंत” का अर्थ सोना होता है और सोना को जितना तपाया जाता है, वह उतना ही अधिक चमकता है. यह चहुंमुखी विकास का बजट है, लेकिन व्यवस्था में पारदर्शिता और संवेदनशीलता आवश्यक है.
पेसा नियमावली और ग्राम सभा के अधिकार
हेमलाल मुर्मू ने कहा कि पेसा नियमावली के तहत पंचायत और ग्राम सभा के बीच टकराव की स्थिति न बने, इसके लिए स्पष्ट व्यवस्था की जानी चाहिए. ग्राम सभा को स्वतंत्र और प्रभावी अधिकार दिए जाने चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास कार्य सुचारु रूप से संचालित हो सकें.
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योजनाओं के वित्तीय प्रावधान पर चर्चा
उन्होंने कहा कि राम जी योजना के कारण झारखंड पर प्रतिवर्ष 5,640 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा. वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना बंद होने के बाद अबुआ आवास योजना शुरू की गई है, जिसके लिए 4,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
उन्होंने बजट प्रावधानों की पारदर्शिता और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की.

