Ranchi : रांची स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान कोल प्रबंधन (आईआईसीएम) में आज सतत खनन और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी और प्रदर्शनी में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि आज जरूरत केवल खनन बढ़ाने की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण के साथ खनन करने की है. उन्होंने कहा कि विकास और प्रकृति दोनों को साथ लेकर चलना समय की मांग है.
विज्ञान भारती के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में कोल इंडिया लिमिटेड, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएसएम) धनबाद, सीएसआईआर-सीआईएमएफआर और झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों ने भाग लिया. इस दौरान राज्यपाल ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह दिवस भारत की वैज्ञानिक शक्ति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार का प्रतीक है.

पोखरण में 1998 में हुए ऑपरेशन शक्ति परमाणु परीक्षण का किया उल्लेख

उन्होंने वर्ष 1998 में पोखरण में हुए ऑपरेशन शक्ति परमाणु परीक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया को अपनी वैज्ञानिक क्षमता और आत्मविश्वास का परिचय दिया था. अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद भारत मजबूती के साथ आगे बढ़ा और वैश्विक स्तर पर नई पहचान बनाई.
सुनाई अपनी राजनीतिक जीवन की पुरानी यादें
राज्यपाल ने अपने राजनीतिक जीवन की पुरानी यादें साझा करते हुए कहा कि उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य करने का मौका मिला था. साथ ही बताया कि वर्ष 1984 के चुनाव के दौरान अटल जी ने बरेली में उनके समर्थन में एक ही दिन में आठ जनसभाएँ की थीं. झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहाँ का कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट तथा यूरेनियम देश की औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. लेकिन जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए अब सतत खनन को प्राथमिकता देना जरूरी हो गया है. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधन केवल आर्थिक विकास का साधन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर भी हैं.
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत 2047, आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने पर्यावरण के लिए जीवनशैली संदेश का उल्लेख करते हुए वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों से अपने शोध और नवाचार को समाज से जोड़ने की अपील की, ताकि विज्ञान और तकनीक का लाभ आम लोगों तक पहुँच सके.
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