Saraikela: Jharkhand Academic Council द्वारा इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम जारी किए जाने के बाद भी सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड स्थित J.K.S.J.M. इंटर कॉलेज आदारडीह के लगभग 300 छात्र-छात्राओं का रिजल्ट अब तक ऑनलाइन जारी नहीं हो सका है. इसे लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों में भारी चिंता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कॉलेज के Arts, Science और Commerce तीनों संकाय के छात्रों का परिणाम लंबित रहने से बच्चों के आगे की पढ़ाई और नामांकन पर संकट खड़ा हो गया है.
कॉलेज परिसर में बुलाई गई आपात बैठक
मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को कॉलेज परिसर में उप प्राचार्य पुरुषोत्तम महतो की अध्यक्षता में कॉलेज की विभिन्न कमेटियों की आपात बैठक आयोजित की गई. बैठक में रिजल्ट जारी नहीं होने पर नाराजगी जताई गई और जैक बोर्ड की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए. बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि सोमवार शाम 5 बजे तक ऑनलाइन रिजल्ट जारी नहीं किया जाता है, तो जैक बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी.

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“हर साल 95 प्रतिशत रिजल्ट आता है”
कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि पिछले 15 वर्षों से संस्थान का परीक्षा परिणाम लगभग 95 प्रतिशत तक रहा है. ऐसे में इस बार अचानक सैकड़ों छात्रों का रिजल्ट लंबित रहना चिंता का विषय है. उप प्राचार्य पुरुषोत्तम महतो ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा सभी छात्रों का फॉर्म सही तरीके से भरा गया था. छात्र-छात्राओं ने परीक्षा भी दी है और प्रैक्टिकल के अंक भी समय पर भेज दिए गए हैं. इसके बावजूद परिणाम जारी नहीं होना समझ से परे है. उन्होंने कहा कि कॉलेज के प्राचार्य फिलहाल रांची स्थित जैक बोर्ड कार्यालय में मामले की जानकारी लेने गए हुए हैं. बोर्ड की ओर से फिलहाल सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है, जबकि रिजल्ट अब तक जारी नहीं किया गया है.

तकनीकी गड़बड़ी की आशंका
कॉलेज प्रबंधन ने आशंका जताई है कि ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि हुई हो सकती है. हालांकि, अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. उप प्राचार्य ने कहा कि “नेट के इस दौर में संभव है कि संख्या भरने या डेटा अपलोड में कहीं गलती हुई हो, लेकिन सही कारण फिलहाल कोई स्पष्ट नहीं बता पा रहा है.”
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दूसरे जिलों और बंगाल से भी पढ़ने आते हैं छात्र
कॉलेज में सरायकेला के अलावा जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, रांची तथा पश्चिम बंगाल के विभिन्न इलाकों से भी छात्र पढ़ाई करने आते हैं. रिजल्ट लंबित रहने से दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों के छात्र मानसिक तनाव में हैं. छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि रिजल्ट नहीं आने से ग्रेजुएशन और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में नामांकन प्रभावित हो रहा है.
विस्थापित अधिकार मंच ने उठाए सवाल
विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि लगभग 300 छात्रों का परीक्षाफल लंबित रहना बेहद चिंताजनक है. उन्होंने कहा, “उच्च शिक्षा में नामांकन के लिए रिजल्ट जरूरी है. ऐसे में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए. यदि शाम 5 बजे तक परिणाम जारी नहीं होता है तो कॉलेज प्रबंधन से जवाब मांगा जाएगा.” राकेश रंजन ने कहा कि बंगाल, बोकारो, रांची, कुकड़ू और नीमडीह क्षेत्र के बच्चे यहां पढ़ते हैं और सभी अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं.
