सोना सुपरहिट और रुपया फ्लॉप: JMM ने केंद्र सरकार पर कसा तंज, पूछा, विकास गन्ने के जूस पर है या 56 इंच की मार्केटिंग में 

Ranchi: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बीजेपी की नीति और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और बढ़ती महंगाई को लेकर तंज कसा है....

Ranchi: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बीजेपी की नीति और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और बढ़ती महंगाई को लेकर तंज कसा है. सोने की बढ़ती कीमतों और गिरते रुपये का हवाला देते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था इवेंट मैनेजमेंट के भरोसे चल रही है, जबकि आम आदमी की कमर टूट चुकी है.

सोना ही क्यों है सेफ एसेट ?

जेएमएम ने सोशल मीडिया के जरिए सवाल उठाया कि पिछले एक साल में सोने के दाम कई गुना बढ़ गए, लेकिन क्या किसी आम आदमी का बैंक डिपॉजिट या रुपये की वैल्यू बढ़ी? जवाब नहीं है. पार्टी के अनुसार, जब जनता का अपनी करेंसी और सरकार की आर्थिक नीतियों पर भरोसा कम होता है, तब वे सुरक्षित भविष्य के लिए सोने की ओर भागते हैं. जेएमएम ने तंज कसते हुए कहा, अगर अर्थव्यवस्था इतनी ही मजबूत होती, तो लोग सुरक्षा बैंकों में ढूंढ़ते, तिजोरियों में नहीं.

अच्छे दिन बनाम व्यक्तिगत आजादी 

पार्टी ने अच्छे दिन के नारे पर निशाना साधते हुए इसे जनता के निजी जीवन में हस्तक्षेप करार दिया. कहा कि अब सरकार तय करना चाहती है कि जनता क्या खाएगी, क्या पहनेगी, क्या बोलेगी और किससे सवाल पूछेगी. यहां तक कि शादियां कैसे करनी हैं और कहां जाना है, इस पर भी अब सरकारी उपदेश आने लगे हैं.

गन्ने का जूस और पकौड़ा 

केंद्र के विकास मॉडल पर निशाना साधते हुए जेएमएम ने कहा पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर पहुंचाकर अब पेट्रोल बचाने का उपदेश दिया जा रहा है. युवाओं के हाथ से नौकरियां छीनकर पकौड़ा तलने को रोजगार बताया गया. डॉलर के मुकाबले रुपया 100 के करीब पहुंच गया, जिसे सरकार मजबूत भारत की निशानी बता रही है. महंगाई से त्रस्त जनता को अमृतकाल के सुनहरे सपने दिखाए जा रहे हैं.

12 साल का इवेंट मैनेजमेंट 

जेएमएम ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश को अर्थव्यवस्था के बजाय इवेंट मैनेजमेंट से चलाया गया है. झाड़ू पकड़ने से लेकर स्टेडियम के शो और विश्वगुरु की मार्केटिंग तक, सब कुछ कैमरे के लिए हुआ. जमीनी हकीकत यह है कि एमएसएमइ तबाह हो चुके हैं, किसान संकट में हैं और मध्यम वर्ग भारी टैक्स और महंगाई के बीच पिस रहा है.नीतियां ऐसी बनाई जा रही हैं जिससे अरबपति मित्र टनों में सोना खरीद रहे हैं, जबकि आम आदमी के लिए इलाज, शिक्षा और घर सब कुछ पहुंच से बाहर होता जा रहा है. सरकार के पास समाधान के नाम पर सिर्फ भाषण और जनता को त्याग सिखाने की नसीहतें बची हैं.

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