Hazaribagh : हजारीबाग सरकारी सिस्टम में पारदर्शिता लाने वाले ‘सूचना का अधिकार कानून’ को हजारीबाग नगर निगम के अधिकारी किस कदर ठेंगा दिखा रहे हैं, इसका एक बड़ा खुलासा हुआ है. हजारीबाग झील के सुंदरीकरण के नाम पर हो रहे खर्च का हिसाब मांगने पर जब नगर निगम ने चुप्पी साध ली, तो मामला उप विकास आयुक्त की अदालत तक जा पहुंचा. अब इस मामले में डीडीसी सह प्रथम अपीलीय पदाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए जन सूचना अधिकारी सह सहायक नगर आयुक्त पर गाज गिराने का आदेश दिया है.
झील के सुंदरीकरण में ‘खर्च’ का हिसाब देने में क्यों कांप रहे हाथ?
पूरा मामला आरटीआई एक्टिविस्ट राजेश मिश्रा के आवेदन से जुड़ा है. उन्होंने नवंबर 2025 में नगर निगम से झील के सौंदर्यीकरण योजना का कच्चा-चिट्ठा मांगा था. राजेश ने पूछा था कि योजना का प्रस्ताव किसने दिया और स्वीकृति कब मिली? सक्षम अधिकारियों की बैठक में क्या निर्णय लिए गए? शहर के किन हिस्सों में कितना पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है? हैरानी की बात है कि निगम प्रशासन ने इन सवालों का जवाब देने के बजाय फाइल दबाए रखना बेहतर समझा. इसके अलावा तीन अन्य मामलों में भी निगम ने सूचना देने में ‘कंजूसी’ दिखाई.

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साहब ने कहा ‘दे दी सूचना’, डीडीसी ने पूछा ‘दिखाओ रसीद’ तो हो गई बोलती बंद
मामला तब दिलचस्प हो गया जब अपील की सुनवाई के दौरान जन सूचना अधिकारी विपिन कुमार ने दावा किया कि उन्होंने 24 फरवरी को ही जानकारी भेज दी है. लेकिन जब डीडीसी ने इसका सबूत मांगा, तो अधिकारी के पास दिखाने के लिए कुछ नहीं था. इसे कानून का मजाक और नियमों का घोर उल्लंघन मानते हुए डीडीसी ने नगर आयुक्त को तत्काल कार्रवाई करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.
नगर आयुक्त बोले- कानून से ऊपर कोई नहीं
इस पूरे घटनाक्रम पर नगर आयुक्त ओम प्रकाश गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि डीडीसी के आदेश का अक्षरशः पालन होगा. दोषी अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी और आवेदक को हर हाल में मांगी गई सूचना उपलब्ध कराई जाएगी.
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