Newswave Desk: रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को लेकर अक्सर लोग यह सोचते हैं कि आखिर बिना नौकरी और नियमित आय के वे अपना खर्च कैसे चलाएंगे. ज्यादातर लोगों को लगता है कि अगर उनके पास 1 करोड़ रुपये हैं, तो बुढ़ापे की जिंदगी आराम से कट जाएगी. लेकिन बढ़ती महंगाई और बदलती लाइफस्टाइल के दौर में हकीकत इससे काफी अलग हो सकती है.
महंगाई धीरे-धीरे घटा देती है पैसों की ताकत
विशेषज्ञों का कहना है कि आज 1 करोड़ रुपये बड़ी रकम जरूर लग सकती है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसकी वैल्यू कम हो सकती है. अगर महंगाई दर औसतन 6 प्रतिशत सालाना रहती है, तो आज का 50 हजार रुपये का मासिक खर्च अगले 10 सालों में काफी बढ़ सकता है. यानी आज जो चीज 100 रुपये में मिल रही है, भविष्य में उसके लिए कहीं ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है.

रिटायरमेंट के बाद खर्च कम नहीं होते
रिटायरमेंट के बाद सैलरी बंद हो जाती है, लेकिन खर्चे जारी रहते हैं. बढ़ती उम्र के साथ मेडिकल और हेल्थकेयर खर्च भी तेजी से बढ़ते हैं. अगर किसी व्यक्ति के पास हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है, तो गंभीर बीमारी उसकी बचत का बड़ा हिस्सा खत्म कर सकती है.
एक्सपर्ट्स क्या सलाह देते हैं?
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रिटायरमेंट के लिए व्यक्ति को अपने मौजूदा सालाना खर्च का कम से कम 25 गुना फंड तैयार करना चाहिए. ऐसे में 1 करोड़ रुपये अच्छी शुरुआत हो सकती है, लेकिन हर किसी के लिए यह पर्याप्त नहीं माना जा सकता.
कहां करें निवेश?
विशेषज्ञों का कहना है कि रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए Systematic Withdrawal Plan, इक्विटी म्यूचुअल फंड, Public Provident Fund और Senior Citizens Savings Scheme जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए. जितनी जल्दी निवेश शुरू किया जाएगा, उतना बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार किया जा सकता है.
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