Saraikela: चांडिल प्रखंड के रसूनिया एवं चांडिल पंचायत में लगभग 750 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने का मामला सामने आया है. सरायकेला-खरसावां उपायुक्त के आदेश पर एसडीओ चांडिल मामले की जांच कर रहे हैं. बड़े संगठित घोटाले की आशंका जताई जा रही है.
750 से ज्यादा फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने का दावा
विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने बताया कि अब तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार रसूनिया पंचायत से 471 तथा चांडिल पंचायत से 279 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं. जांच आगे बढ़ने के साथ यह संख्या और भी बढ़ सकती है.

कई स्तरों पर होता है सत्यापन
उन्होंने कहा कि जन्म अथवा मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर सत्यापन किया जाता है. इसमें आवेदन पत्र पर मुखिया. पंचायत समिति सदस्य. वार्ड सदस्य एवं आंगनबाड़ी सेविका का सत्यापन आवश्यक होता है. साथ ही आवेदक का आधार कार्ड. स्थानीय गवाही एवं अन्य दस्तावेज लगाए जाते हैं. इसके बाद पंचायत सचिव द्वारा सत्यापन किया जाता है तथा अंत में प्रखंड विकास पदाधिकारी. BDO का अनुमोदन जरूरी होता है.
संगठित रैकेट की आशंका
इतने स्तरों के सत्यापन के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र जारी होना संगठित रैकेट की ओर इशारा करता है. आशंका है कि बाहरी लोगों को फायदा पहुंचाने या सरकारी योजनाओं का गलत लाभ लेने के लिए यह फर्जीवाड़ा किया गया है.
कई जिलों और राज्यों के लोगों के नाम पर बने प्रमाण पत्र
राकेश रंजन महतो ने बताया कि गिरिडीह. धनबाद. बोकारो. हजारीबाग सहित अन्य जिलों एवं राज्यों के लोगों के नाम पर भी यहां से प्रमाण पत्र निर्गत किए गए हैं. इससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है.
सरकारी योजनाओं में फर्जी लाभ लेने की आशंका
फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनने से सरकारी योजनाओं. आवास. पुनर्वास. छात्रवृत्ति एवं अन्य लाभों में बड़े पैमाने पर फर्जी तरीके से घुसपैठ हो सकती है. इससे वास्तविक गरीब एवं स्थानीय लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं.
फर्जी दस्तावेज और सुरक्षा पर खतरे की आशंका
उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से फर्जी आधार कार्ड. राशन कार्ड. वोटर आईडी. जाति एवं निवास प्रमाण पत्र बनाकर सरकारी नौकरी. आरक्षण व्यवस्था तथा विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी धोखाधड़ी की आशंका बढ़ जाती है. साथ ही बाहरी लोगों के नाम पर दस्तावेज निर्गत होने से राष्ट्रीय सुरक्षा. कानून व्यवस्था एवं सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न होता है.
उच्च स्तरीय जांच की मांग
विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन ने मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए. साथ ही अब तक निर्गत सभी संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्रों की पुनः जांच कर उन्हें तत्काल निरस्त किया जाए तथा इसमें शामिल बिचौलियों. कर्मचारियों एवं अधिकारियों की भूमिका सार्वजनिक की जाए.
