Hazaribagh: जिले के इचाक प्रखंड अंतर्गत तिलरा भुसवा बिरहोर कॉलोनी में सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना कथित लापरवाही और अनियमितताओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है. लाखों रुपये की लागत से बनाए गए दो जलमीनार आज केवल ढांचे के रूप में खड़े हैं, जबकि बिरहोर परिवार एक बूंद शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहा है.
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों जलमीनार निर्माण के कुछ ही समय बाद ही खराब हो गए. कहीं मोटर खराब हो गई तो कहीं सोलर सिस्टम और पाइपलाइन ने काम करना बंद कर दिया.

इसके बावजूद लंबे समय तक मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई. ठेकेदार भी 5 साल की गारंटी अवधि समाप्त होने के इंतजार में टालमटोल करता रहा. बिरहोर परिवार के अनुसार, योजना का उद्देश्य घर-घर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है.
दूषित पेयजल पीने को विवश बिरहोर समुदाय
आज भी लोग मजबूरी में चापाकल के दूषित पानी पर निर्भर हैं, जिससे स्वास्थ्य संकट की आशंका बनी हुई है. सबसे गंभीर आरोप यह है कि शिकायतों के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार को बार-बार सूचित किया गया, लेकिन केवल आश्वासन ही मिलता रहा और समय बीतता चला गया. इसी बीच गारंटी अवधि समाप्त होने की बात सामने आने लगी. बिरहोर परिवार के कई सदस्यों ने बताया कि योजना शुरू होने पर उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें स्वच्छ पानी मिलेगा, लेकिन यह उम्मीद धीरे-धीरे निराशा में बदल गई.
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ठेकेदार को किसका संरक्षण?
वहीं, बिरहोर परिवार द्वारा यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि संबंधित ठेकेदार को कथित रूप से संरक्षण प्राप्त रहा, जिससे मामले की जांच और कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी. बिरहोर परिवार अब उच्चस्तरीय जांच, तत्काल मरम्मत और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच सके, न कि योजना की राशि ठेकेदार गटक सके. इस संबंध में ठेकेदार से भी बात की गई, लेकिन उन्होंने एग्रीमेंट फेल होने का हवाला देते हुए टालमटोल किया.
