Ranchi: जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल रिम्स एक बार फिर सवालों के घेरे में है. वर्ष 2025 में अस्पताल प्रशासन द्वारा मशीन, दवा, सर्जिकल, केमिकल, आईटी और अन्य सामग्रियों की खरीद पर अब तक करीब 196.27 करोड़ रुपये खर्च और प्रक्रियाधीन बताए गए हैं. इसके बावजूद अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतें कम नहीं हो रही हैं. मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं, जांच में देरी हो रही है और कई वार्डों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है.
मशीनों पर सबसे अधिक खर्च
आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक राशि मशीन उपकरण मद में खर्च की जा रही है. इस मद में कुल 140.10 करोड़ रुपये में से 60.37 करोड़ रुपये का क्रयादेश जारी किया गया है, जबकि लगभग 79.72 करोड़ रुपये की खरीद प्रक्रिया अब भी जारी है. इसके बावजूद कई विभागों में मशीनें या तो बंद पड़ी हैं या मरीजों को समय पर जांच की सुविधा नहीं मिल रही.

दवा खरीद पर खर्च, फिर भी शिकायतें
दवा मद में करीब 9.39 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए, जिसमें से 8.59 करोड़ रुपये की दवा खरीद ली गई है. लेकिन अस्पताल आने वाले मरीजों का आरोप है कि अधिकांश जरूरी दवाइयां स्टोर में उपलब्ध नहीं रहतीं और उन्हें बाहर की मेडिकल दुकानों का सहारा लेना पड़ता है.
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सर्जिकल सामग्री की खरीद पर भी सवाल
सर्जिकल सामग्री पर 19.77 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इसमें से 19.36 करोड़ रुपये की खरीद हो चुकी है. बावजूद इसके ऑपरेशन और उपचार के दौरान मरीजों को कई बार जरूरी सामान खुद खरीदने की नौबत आती है.
जांच में देरी की शिकायतें बरकरार
केमिकल सामग्री के लिए 11.28 करोड़ रुपये तय किए गए, जिसमें से 6.63 करोड़ रुपये की खरीद हो चुकी है, जबकि शेष राशि की प्रक्रिया जारी है. कई पैथोलॉजी जांचों में देरी और रिपोर्टिंग की समस्याएं लगातार सामने आती रही हैं.
आईटी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
विविध सामग्रियों पर 5.16 करोड़ रुपये और आईटी सामग्री पर 10.55 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. आईटी मद में करीब 9.95 करोड़ रुपये की खरीद हो चुकी है. इसके बावजूद अस्पताल की ऑनलाइन व्यवस्था, रजिस्ट्रेशन सिस्टम और डेटा प्रबंधन को लेकर शिकायतें बनी हुई हैं.
जमीनी स्थिति पर उठ रहे सवाल
कुल मिलाकर वर्ष 2025 में अब तक 196.27 करोड़ रुपये की खरीद और खरीद प्रक्रिया दर्शाई गई है. इसमें से 109.25 करोड़ रुपये की सामग्री खरीदी जा चुकी है, जबकि 87.02 करोड़ रुपये की खरीद प्रक्रिया में है. इतने बड़े खर्च के बावजूद अस्पताल की जमीनी स्थिति पर लगातार सवाल उठ रहे हैं.
