Ranchi: झारखंड सरकार ने झारखंड कल्याण सेवा के पदाधिकारियों की कार्यकुशलता और प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. झारखंड राज्य प्रशिक्षण नीति, 2023 के तहत अब कल्याण सेवा के अधिकारियों के लिए सेवा में प्रवेश, सेवाकालीन और पदोन्नति के समय तीन चरणों में अनिवार्य प्रशिक्षण पाठ्यक्रम निर्धारित कर दिया गया है. अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना (झारखंड गजट) जारी कर दी है. इस आदेश को विभागीय मंत्री की मंजूरी भी मिल चुकी है.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूरे प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के दौरान अधिकारियों की 90% उपस्थिति अनिवार्य होगी. इससे कम उपस्थिति होने पर प्रशिक्षण पूर्ण नहीं माना जाएगा.

सेवा में प्रवेश के समय 8 सप्ताह की आधारभूत ट्रेनिंग
अधिसूचना के मुताबिक, सेवा में शामिल होने वाले नए परीक्ष्यमान प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों के लिए आठ सप्ताह का बुनियादी प्रशिक्षण अनिवार्य होगा, जिसे तीन अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा.
पहले चरण में विभागीय कार्यों की जानकारी दी जाएगी, जबकि दूसरे चरण में जिलों में व्यावहारिक प्रशिक्षण कराया जाएगा.
ग्रेडिंग और दोबारा ट्रेनिंग का कड़ा नियम
जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी पांच सप्ताह के कार्य का मूल्यांकन करेंगे और अधिकारियों को ग्रेडिंग (जैसे- उत्कृष्ट, बहुत अच्छा, अच्छा, संतोषप्रद आदि) देंगे.
यदि किसी अधिकारी की ग्रेडिंग औसत से नीचे पाई जाती है, तो उसे दोबारा दो सप्ताह की ट्रेनिंग से गुजरना होगा.
छह से आठ साल में एक बार सेवाकालीन प्रशिक्षण
सेवा में कार्यरत अधिकारियों के ज्ञान को समय-समय पर अपडेट करने और उनकी निर्णय लेने की क्षमता बेहतर बनाने के लिए हर 6 से 8 साल में एक बार दो सप्ताह की अनिवार्य ट्रेनिंग दी जाएगी. इसमें मुख्य रूप से लीडरशिप, कम्युनिकेशन, ई-गवर्नेंस, व्यवहारिक और नैतिक मुद्दों तथा कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट जैसे विषय शामिल होंगे.
जब भी किसी अधिकारी को अगली उच्च श्रेणी या पद पर प्रमोट किया जाएगा, तो नई भूमिका और जिम्मेदारियों को समझने के लिए तीन से पांच दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसमें तनाव प्रबंधन, सुशासन, प्रशासनिक कानून, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और सरकारी योजनाओं में हुए नए बदलावों की जानकारी दी जाएगी.
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