हजारीबाग: शौचालय योजना में 50 लाख के घोटाले की बू, बीडीओ के पत्र ने खोली पोल

Hazaribagh: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शौचालय निर्माण योजना में कथित वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है. ग्राम पंचायत...

Hazaribagh: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शौचालय निर्माण योजना में कथित वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है. ग्राम पंचायत रानीचुआ में लगभग 50 लाख रुपये की सरकारी राशि के गबन और बंदरबांट के आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है. पंचायत की मुखिया मूर्ति देवी ने उपायुक्त को आवेदन देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. मामले को उस समय और गंभीर माना जाने लगा, जब वर्ष 2022 में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) बरही द्वारा जारी एक पत्र सामने आया. पत्रांक 1555, दिनांक 23 नवंबर 2022 में बीडीओ ने स्पष्ट रूप से कहा था कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए अग्रिम राशि उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन कई समितियों ने अब तक उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) जमा नहीं किया है. पत्र में संबंधित समितियों को 24 घंटे के भीतर उपयोगिता प्रमाण पत्र, कैशबुक, पासबुक और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया था. साथ ही चेतावनी भी दी गई थी कि आदेश का पालन नहीं होने पर विभागीय दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.

यह भी पढ़ें: दूध के बाद अब ब्रेड ने बढ़ाई टेंशन, कई शहरों में ₹5 तक महंगे हुए पैकेट

दस्तावेजों की जांच में भारी वित्तीय अनियमितता उजागर: मुखिया

मुखिया मूर्ति देवी का आरोप है कि दस्तावेजों की जांच में भारी वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है. उन्होंने दावा किया कि पंचायत में करीब 50 लाख रुपये की सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया, लेकिन अब तक किसी भी दोषी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नवंबर 2022 में ही पूर्व की जल सहिया समितियों को हटाकर नई समितियों के गठन की मांग की गई थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.

यह भी पढ़ें: PM का नॉर्वे दौरा: भारत-नॉर्वे के बीच 5 अहम समझौते पर हस्ताक्षर, विज्ञान और तकनीक साझेदारी मजबूत करने पर जोर

उठे कई सवाल

अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब बीडीओ ने स्वयं उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं मिलने और कार्रवाई की चेतावनी का उल्लेख किया था, तो आखिर वर्षों बाद भी राशि का समायोजन क्यों नहीं हो सका? क्या अधिकारियों और समितियों की मिलीभगत से सरकारी धन के दुरुपयोग का खेल चलता रहा? इस संबंध में मुखिया प्रतिनिधि रामचंद्र टुडू ने आरोप लगाया कि पूर्व मुखिया रीता मुर्मू और अन्य लोगों द्वारा शौचालय योजना की राशि का निजी कार्यों में उपयोग किया गया. उन्होंने कहा कि योजना में ऑफलाइन चेक के माध्यम से राशि का दुरुपयोग हुआ है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. फिलहाल मामला तूल पकड़ता जा रहा है और ग्रामीणों की निगाहें अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *