Ranchi: झारखंड में सूरज आग उगल रहा है, पारा आसमान छू रहा है, लेकिन राज्य की बिजली व्यवस्था आईसीयू में जाने को तैयार बैठी है. झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम लिमिटेड की लापरवाही के कारण आज पूरा प्रदेश एक भयानक त्रासदी झेल रहा है. निगम के क्वालिटी ऑफ पावर देने का वादा खोखला नजर आ रहा है. आलम यह है कि इस भीषण गर्मी में वोल्टेज का स्तर इतना गिर चुका है, कि घरों में लगे पंखे सिर्फ ‘डोल’ रहे हैं, फ्रीज ने लोड लेना बंद कर दिया है और महंगे एसी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं. जनता टैक्स भी दे रही है और गर्मी की भट्टी में झुलसने को मजबूर भी है.

अर्थिंग के नाम पर मानसून का इंतजार
बिजली विभाग की तकनीकी विफलता का सबसे बड़ा सच यह है कि पूरे राज्य में अर्थिंग की भारी समस्या है. बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है. जब बुनियादी अर्थिंग ही गायब है, तो वोल्टेज आएगा कहां से? वितरण निगम खुद कोई सुधार करने के बजाय ‘मानसून’ का इंतजार कर रहा है. अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं कि कब आसमान से बारिश होगी, जमीन को प्राकृतिक अर्थिंग मिलेगी और तब जाकर वोल्टेज सुधरेगा. यानी, राज्य की सवा तीन करोड़ जनता की बिजली आपूर्ति अब पूरी तरह से भगवान भरोसे है.
मेंटेनेंस के नाम पर साल भर कटती है बिजली, नतीजा ढाक के तीन पात
रांची समेत पूरे राज्य में ‘शटडाउन’ और ‘मेंटेनेंस’ के नाम पर हर दिन घंटों बिजली काटना एक परम्परा बन चुकी है. जेबीवीएनएल का यह तथाकथित मेंटेनेंस का खेल साल के 12 महीने यानि दिन चलता है. मेंटेनेंस के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जाते हैं, लेकिन नतीजा क्या निकलता है? जरा सी हवा चली नहीं कि पावर ट्रिप हो जाता है. बूंद भर बारिश हुई नहीं कि पूरा शहर ब्लैकआउट हो जाता है.
एबीसी केबलिंग का काम अधूरा, जलते ट्रांसफार्मर और पिघलते तार
दावे किए गए थे कि एबीसी केबलिंग का काम पूरा होते ही बिजली आपूर्ति का कायाकल्प हो जाएगा. लेकिन सच यह है कि यह काम आज भी अधूरा लटका हुआ है. गर्मी बढ़ते ही ट्रांसफार्मर धड़ाधड़ जल रहे हैं, क्योंकि उन पर क्षमता से अधिक लोड है और कूलिंग की कोई व्यवस्था नहीं है. जगह-जगह तार गलकर टूट रहे हैं. जेबीवीएनएल के पास न तो बैकअप प्लान है और न ही इस आपातकाल से निपटने की कोई इच्छाशक्ति.
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