Hazaribagh : कभी अपनी सदाबहार ठंडी आब-ओ-हवा और ‘मिनी कश्मीर’ के रूप में विख्यात झीलों का शहर हजारीबाग इन दिनों भीषण आग उगल रहा है. जिले का अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिसने आम जनजीवन और लोगों की रोजमर्रा की दिनचर्या को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है. सुबह ढलते ही सूरज की तेज तपिश और गर्म हवाओं के थपेड़ों ने लोगों को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया है.

दिन के 10 बजे के बाद ही शहर के मुख्य चौक-चौराहों
हालत यह है कि दिन के 10 बजे के बाद ही शहर के मुख्य चौक-चौराहों, बाजारों और सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा पसर जाता है, जहां आम दिनों में भारी चहल-पहल हुआ करती थी. दोपहर होते-होते स्थिति इतनी गंभीर हो जा रही है कि सड़कों पर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है. लोग बेहद जरूरी काम होने पर ही पूरी एहतियात के साथ बाहर आ रहे हैं. राहगीर भी तेज धूप से बचने के लिए पेड़ों की छांव की तलाश में भटकते दिख रहे हैं. इस जानलेवा गर्मी के बीच ट्रैफिक पुलिस के जवान छाता लगाकर सड़कों पर ड्यूटी करने को मजबूर हैं. खुद को ठंडा रखने के लिए लोग बाजारों में कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम, नींबू पानी, शर्बत और अन्य शीतल पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं, जिससे इन चीजों की मांग में अचानक भारी उछाल आया है.
आसमान से बरसती आग, जमीन पर रेंगती बिजली: दोहरी मार से हांफ रहा शहर
इस भीषण गर्मी और उमस के बीच शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक गहराए बिजली संकट ने आग में घी डालने का काम किया है. हजारीबाग और इसके आसपास के क्षेत्रों में रोजाना 5 से 6 घंटे तक टुकड़ों में बिजली की भारी कटौती की जा रही है. स्थिति यह है कि हर आधे-एक घंटे पर बत्ती गुल होना आम बात हो गई है. लगातार पावर कट के कारण घरों में लगे पंखे और कूलर इस भीषण तपिश के आगे पूरी तरह बेअसर साबित हो रहे हैं, जिससे लोगों का दिन का चैन और रातों की नींद गायब हो चुकी है.
पानी का गंभीर संकट खड़ा
इस अव्यवस्था की सबसे भारी कीमत बुजुर्गों, बच्चों और अस्पताल में भर्ती मरीजों को चुकानी पड़ रही है. बिजली संकट का सीधा असर पानी की आपूर्ति पर भी पड़ा है. बिजली नहीं रहने से पानी की मोटरें नहीं चल पा रही हैं, जिससे पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और ग्रामीण इलाकों में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. परेशान स्थानीय जनता ने प्रशासन से बिजली आपूर्ति में तुरंत सुधार करने और पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने की पुरजोर मांग की है.
मासूमों पर भारी पड़ती ‘मई की तपिश’: स्कूल खुले रहने से भड़के अभिभावक
भीषण गर्मी के इस दौर में स्कूलों का नियमित संचालन जारी रहने से बच्चों और उनके अभिभावकों की चिंताएं चरम पर हैं. सुबह स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे तेज धूप और उमस के कारण बुरी तरह बेहाल हो रहे हैं. सबसे ज्यादा परेशानी दोपहर में स्कूल से लौटते समय हो रही है, जब सूरज ठीक सिर पर होता है. गर्मी के कारण कई बच्चों में सिरदर्द, भारी थकान, उल्टी, चक्कर आने और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आने लगी हैं. अभिभावकों का कहना है कि ऐसी जानलेवा स्थिति में बच्चों को स्कूल भेजना उनके स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अभिभावकों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि या तो स्कूलों के समय में तत्काल बदलाव किया जाए या फिर समय से पहले गर्मी की छुट्टियां घोषित की जाएं.
अस्पतालों में डिहाइड्रेशन का ‘अटैक’: डॉक्टरों ने दी बिना ढके बाहर न निकलने की चेतावनी
गर्मी का सीधा और जानलेवा असर लोगों के स्वास्थ्य पर साफ दिखने लगा है. हजारीबाग सदर अस्पताल समेत विभिन्न निजी क्लीनिकों में मौसमी बीमारियों, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक से पीड़ित मरीजों की संख्या में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई है.
डॉक्टरों का कहना
डॉक्टरों का कहना है कि बदलते मौसम और इस भीषण गर्मी में बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है. चिकित्सकों ने आम जनता को सलाह दी है कि वे दोपहर के समय बेवजह बाहर न निकलें, शरीर में पानी की कमी न होने दें और अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेहत के लिए सेवन करें. बाहर निकलते समय हमेशा सिर को ढककर रखें और हल्के सूती कपड़े पहनें, इसके साथ ही बासी भोजन से परहेज करने और अत्यधिक ठंडे पेय पदार्थों या आइसक्रीम के अचानक सेवन से बचने की हिदायत दी गई है, क्योंकि इससे तबीयत और बिगड़ सकती है.
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