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झांसी से लेकर हरियाणा तक जुड़े तार, फर्जी ब्रांड दिखाकर जालसाजों ने लगाया चूना, चेक भी हुए बाउंस, 5 के खिलाफ केस दर्ज
Ranchi: राजधानी रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र में एक कॉरपोरेट धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है, जहां ‘ओस्टेनबर्ग अल्ट्रा प्रीमियम स्ट्रॉन्ग बीयर’ (Austenberg Ultra Premium Strong Beer) की डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने के नाम पर एक स्थानीय व्यवसायी से एक करोड़ की ठगी कर ली गई. ठगों ने पीड़ित को विश्वास में लेने के लिए एक ऐसे बीयर ब्रांड का प्रदर्शन किया, जिसका असल में देश के किसी भी राज्य में कोई अस्तित्व ही नहीं है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अरगोड़ा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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झांसे की शुरुआत: ‘महाराष्ट्र-तेलंगाना में सुपरहिट है हमारा ब्रांड’
दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, हरमू हाउसिंग कॉलोनी स्थित ‘मेसर्स रॉयल्सिप ब्रुअरीज डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड’ (RBDPL) के निदेशक राज कुमार पाठक से अगस्त 2024 में तीन लोगों ने संपर्क किया था. इनमें अजय कुमार (निवासी: बरियातू, रांची), कुमार संभव और वृंदा संभव (दोनों निदेशक, मेसर्स एक्सोटिक लिकर प्रा. लि. गुड़गांव) शामिल थे. आरोपियों ने दावा किया कि उनका ओस्टेनबर्ग बीयर’ ब्रांड महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों में बेहद लोकप्रिय है और अब वे झारखंड में इसके विस्तार के लिए डिस्ट्रीब्यूटर ढूंढ रहे हैं.
किश्तों में लिए 1 करोड़ रुपये, फिर पलटी कंपनी
ठगों के बुने जाल में आकर पीड़ित व्यवसायी की कंपनी ने रांची कार्यालय में ही एग्रीमेंट साइन कर लिया. आरोपियों ने भरोसा दिलाया था कि सरकारी विभागों से जुड़े सभी रजिस्ट्रेशन, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और कानूनी कागजात उनकी कंपनी संभाल लेगी. इसके एवज में 17 सितंबर 2024 से 3 जनवरी 2025 के बीच किश्तों में कुल ₹1 करोड़ का निवेश करा लिया गया. रकम हाथ में आते ही आरोपियों का रंग बदलने लगा और वे बीयर की सप्लाई देने में टालमटोल करने लगे. हद तो तब हो गई जब अगस्त 2025 में आरोपियों ने एकतरफा पत्र भेजकर एग्रीमेंट ही निरस्त कर दिया.
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लौटाए 10-10 लाख के 10 चेक, सब निकले स्टॉप पेमेंट वाले
जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी, तो दबाव में आकर आरोपियों ने ‘मेसर्स एक्सोटिक लिकर प्रा. लि.’ के नाम के 10 चेक (प्रत्येक ₹10 लाख, कुल ₹1 करोड़) सौंप दिए, जिसपर कुमार संभव के हस्ताक्षर थे. जब पीड़ित ने निर्देशानुसार पहला चेक 17 मार्च 2026 को बैंक में लगाया, तो वह ‘स्टॉप पेमेंट’ (भुगतान रोकने के आदेश) के कारण बाउंस हो गया. इसके बाद जब आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने पूरी तरह से पल्ला झाड़ लिया और बात करने से मुकर गए.
कॉरपोरेट सेक्टर को निशाना बनाता है यह गैंग
पीड़ित के अनुसार, छानबीन में पता चला है कि यह गिरोह योजनाबद्ध तरीके से कॉरपोरेट सेक्टर की कंपनियों को अपना निशाना बनाता है और उन्हें अपने चंगुल में फंसाकर ठगी करता है. इस पूरे सिंडिकेट में कंपनी की अन्य निदेशक देवानी देशमुख और हर्षवर्धन सिंह भी शामिल हैं, जिन्होंने झारखंड के रांची में बाकायदा कार्यालय खोलकर नए निवेशकों को फंसाने का जाल बुना था.
