Akshay Kumar Jha
Ranchi: 2014 के अक्टूबर महीने में हेमंत सोरेन की सरकार ने अपने कर्मियों को एक सौगात दिया. सरकार ने अपने कर्मियों के लिए बहुत ही सस्ते दर पर होम लोन देने की घोषणा की. इस घोषणा के बाद अब कोई भी सरकारी कर्मी वित्त विभाग से तीस लाख रुपए का उधार मात्र 7.5% साधारण ब्याज की दर से ले सकता था. बाद में हेमंत सोरेन जब तीसरी बार सीएम बने तो उन्होंने इस लोन की रकम को बढ़ाकर दोगुणा यानी साठ लाख कर दिया. मतलब सरकार का कोई भी कर्मी अब फ्लैट लेने या फिर जिसके पास जमीन है, वो घर बनाने के लिए वित्त विभाग से इस साधारण या कहा जाए तो अद्भुत ब्याज की दर पर साठ लाख लोन सकता है. हेमंत सोरेन की सरकार की तरफ से झारखंड सरकार के कर्मियों के लिए इसे एक सौगात के रूप में देखा जाने लगा. लेकिन इस अदभुत कहे जाने वाले ब्याज दर पर लोन लेने की व्यवस्था को सरकारी कर्मियों ने मजाक बनाकर रख दिया. लोन के लिए आवेदन तो आवास के नाम पर दिया गया. लेकिन लोन के रकम का निवेश गलत तरीके से दूसरे प्लेटफॉर्म पर किया जाने लगा.
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वित्त विभाग के पास मैकेनिजम की कमी
सरकारी कर्मी साठ लाख का लोन लेकर फ्लैट खरीद रहे हैं या आवास बना रहे हैं, इसे देखने का कोई मैकेनिजम ही नहीं है. इसका फायदा सरकारी कर्मियों ने खूब उठाया है. लोन लेकर कोई अपने भाई के व्यापार में निवेश कर रहा है, तो कोई किसी ने दूसरे प्लेटफॉर्म पर निवेश कर लाखों कमा रहा है. हालांकि 2024 में जब लोन की रकम को बढ़ाकर तीस से साठ लाख कर दी गयी, उस वक्त वित्त विभाग ने नौ पन्नों के संकल्प में कई सारे नियम और कायदे जोड़े. लेकिन ये सारे नियम और कायदे फाइलों में दबकर रह गए. जियो टैग का भी नियम बनाया गया. लेकिन पिछले चार सालों में शायद ही किसी ने अपने आवास का जियो टैगिंग कराया.
लोन लेने वालों से न्यूज वेभ ने की बात
न्यूज वेभ के संवादाता ने ऐसे कई सरकारी कर्मियों से बात की जिन्होंने आवास के नाम पर वित्त विभाग से साठ लाख या तीस लाख का लोन लिया है. नाम नहीं बताने और दोस्ताना अंदाज में बात करते हुए कई लोगों ने कहा कि यह योजना काफी अच्छी है. घर का कोई भी बड़ा काम हो तो वित्त विभाग से आवास के नाम पर लोन निकाला और काम खत्म किया. हालांकि लोन की किस्त लगातार वेतन से कट रही है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब सरकार की तरफ से आवास बनाने के लिए लोन दिया गया, तो सरकारी कर्मी इसका गलत इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं…
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