Ranchi: राजधानी रांची में एक निजी अस्पताल के डॉक्टर और प्रबंधन पर इलाज के दौरान घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगा है, जिसके कारण झारखंड विधानसभा की एक महिला कर्मचारी की जान चली गई. मृतका के परिजनों ने इसे सीधे तौर पर “हत्या” करार देते हुए कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए लिखित आवेदन दिया है. वहीं दूसरी तरफ मंगलवार को झारखंड विधानसभा के कर्मी शव के साथ विधानसभा में धरना पर बैठ गए हैं.

क्या है पूरा मामला?
रांची के मोरहाबादी (हरिहर सिंह रोड, बालाजी अपार्टमेंट) निवासी सुनील कुमार शुक्ला ने पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी है. शिकायत के मुताबिक, उनके छोटे भाई स्वर्गीय दीपक कुमार शुक्ला की पत्नी श्रीमती अंजना तिवारी, जो झारखंड विधानसभा में निम्नवर्गीय सचिवालय सहायक के पद पर कार्यरत थीं, उन्हें गॉलब्लैडर में स्टोन की शिकायत थी. उन्हें ऑपरेशन के लिए रांची के मेन रोड स्थित सेंटाविटा अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अस्पताल के डॉ. राजेश कुमार मारू द्वारा उनका ऑपरेशन किया जाना तय हुआ था.
ऑपरेशन के दौरान कटी नस, अत्यधिक रक्तस्राव
परिजनों का आरोप है कि 24 मई को ऑपरेशन के दौरान डॉ. राजेश कुमार मारू की गंभीर लापरवाही के कारण मरीज की आर्टरी कट गई. इसके बाद मरीज के शरीर से अत्यधिक मात्रा में खून बहने लगा और उनकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई. लापरवाही का आलम यह था कि स्थिति को संभालने के लिए मरीज को एक ही दिन में छह यूनिट कोल्ड ब्लड और दो यूनिट प्लाज्मा चढ़ाया गया, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ.
‘कार्डियक अरेस्ट’ का बहाना बनाकर दूसरे अस्पताल किया रेफर
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि जब डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन को समझ आ गया कि मरीज मरणासन्न स्थिति में पहुंच चुकी है, तो अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए उन्होंने कार्डियक अरेस्ट का हवाला दिया. आनन-फानन में मरीज को महावीर मणिपाल अस्पताल रेफर कर दिया गया.
इलाज के दौरान तोड़ा दम, परिजनों ने मांगा न्याय
अत्यंत दुखद बात यह रही कि महावीर मणिपाल अस्पताल में भी डॉक्टर अंजना तिवारी को नहीं बचा सके. 26 मई की सुबह इलाज के क्रम में उनका निधन हो गया. मृतका के जेठ सुनील कुमार शुक्ला ने सीधे तौर पर सेंटाविटा अस्पताल के डॉक्टर राजेश कुमार मारू और अस्पताल प्रबंधन की मिलीभगत पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है. उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि डॉक्टर की यह लापरवाही सीधे तौर पर हत्या है. अस्पताल प्रबंधन भी इसमें पूरी तरह संलिप्त है. ऐसे गैर-जिम्मेदार डॉक्टरों और प्रबंधन पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.
