गुजरात कमाने गया मोहन अब ताबूत में लौटेगा, विष्णुगढ़ के कुसुम्भा गांव में मातम, संदिग्ध हालात में मौत ने खड़े किए कई सवाल

Bishungarh : दो जून की रोटी की तलाश में घर से निकला एक गरीब मजदूर अब ताबूत में अपने गांव लौटेगा, विष्णुगढ़...

Bishungarh : दो जून की रोटी की तलाश में घर से निकला एक गरीब मजदूर अब ताबूत में अपने गांव लौटेगा, विष्णुगढ़ प्रखंड के कुसुम्भा पंचायत निवासी मोहन राम की गुजरात में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने की खबर से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है. जिस घर से कभी रोज़गार की उम्मीद लेकर मोहन बाहर गए थे, आज उसी घर में उनके शव के आने का इंतजार हो रहा है. मोहन राम, जुनदरिया भुइंया के पुत्र थे और गांव के ही एक ठेकेदार के साथ मजदूरी करने गुजरात गए थे. परिजनों को उनकी मौत की सूचना तो मिल गई, लेकिन आखिर उनकी मौत कैसे हुई, इस पर अब भी रहस्य बना हुआ है. यही सवाल परिवार को भीतर तक तोड़ रहा है.

घर का इकलौता सहारा था मोहन   

ग्रामीणों के अनुसार मोहन राम बेहद साधारण जीवन जीने वाले मेहनतकश इंसान थे. उनके बड़े सपने नहीं थे. वे सिर्फ इतना चाहते थे कि घर का चूल्हा जलता रहे, बच्चों की पढ़ाई और जरूरतें किसी तरह पूरी होती रहें और परिवार सम्मान के साथ जीवन काट सके. लेकिन नियति को शायद कुछ और मंजूर था. कमाने गया यह मजदूर अब शव बनकर लौट रहा है. परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि मोहन परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे. उनकी कमाई से ही घर चलता था. अब उनकी मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है.

पत्नी की सूनी आंखें, बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल

मोहन राम की मौत की खबर मिलते ही घर में चीख-पुकार मच गई. पत्नी पर्वतिया देवी का रो-रोकर बुरा हाल है. उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे. बच्चे बेसुध हैं और घर का माहौल गमगीन बना हुआ है, गांव के लोग लगातार परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं, लेकिन हर चेहरे पर एक ही सवाल साफ दिखाई दे रहा है “आखिर गरीब की जिंदगी इतनी सस्ती क्यों हो गई है?”.

देर रात गांव पहुंच सकता है शव

प्राप्त जानकारी के अनुसार मोहन राम का शव देर रात तक उनके पैतृक गांव पहुंचने की संभावना है. गांव के लोग भारी मन से शव के आने का इंतजार कर रहे हैं. पूरे कुसुम्भा गांव में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है.

मौत पर उठे सवाल, जांच और मुआवजे की मांग

मृतक के परिजनों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा करने तथा परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है. वहीं ग्रामीणों ने भी प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सरकार से ठोस पहल की मांग की है. उनका कहना है कि रोजगार के अभाव में गांव के गरीब मजदूर मजबूरी में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं, लेकिन कई बार वे जिंदा लौटकर वापस नहीं आ पाते.

प्रवासी मजदूरों की पीड़ा फिर आई सामने

मोहन राम की मौत ने एक बार फिर उन हजारों गरीब मजदूरों की पीड़ा को सामने ला दिया है, जो परिवार के बेहतर भविष्य के लिए अपना घर-बार छोड़कर दूर-दराज राज्यों में काम करने जाते हैं. रोटी की तलाश में शुरू हुआ सफर कब मौत की खबर में बदल जाए, यह कोई नहीं जानता.

Also Read : बकरीद में दो कंपनी रैफ सहित 2000 जवान करेंगे जिला की सुरक्षा

 

 

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *