रांची: राज्यभर में कुल 2 लाख 74 हजार 551 चापाकल हैं. इनमें से 1 लाख 98 हजार 145 चापाकल ही कार्यरत हैं, जबकि 76,299 चापाकल खराब पड़े हैं.

वित्त मंत्री ने पिछले वर्ष 10 मई को चापाकलों की मरम्मत के लिए 259 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी. साथ ही सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को निर्देश दिया गया था कि खराब चापाकलों की मरम्मत तेजी से कराई जाए. इसके बावजूद राज्य में अब भी 76,299 चापाकल खराब पड़े हुए हैं.
3,000 से 9,000 तक चापाकल खराब
रांची समेत नौ जिलों में 3,000 से 9,000 तक चापाकल खराब हैं. सबसे अधिक बोकारो में 10,186 और गढ़वा में 8,942 चापाकल खराब हैं. इसके अलावा
पाकुड़ में 3,534,
देवघर में 5,729,
धनबाद में 4,142,
दुमका में 3,891,
गिरिडीह में 4,179,
खूंटी में 3,986 और
रांची में 3,707 चापाकल खराब पड़े हैं.
किस जिले में कितने चापाकल खराब
जिला — खराब चापाकलों की संख्या
• बोकारो – 10,186
• चतरा – 1,439
• देवघर – 5,729
• धनबाद – 4,142
• दुमका – 3,891
• गढ़वा – 8,942
• कोडरमा – 2,003
• लातेहार – 702
• लोहरदगा – 909
• पाकुड़ – 3,534
• गिरिडीह – 4,179
• गोड्डा – 1,778
• गुमला – 975
• हजारीबाग – 1,990
• जामताड़ा – 4,647
• खूंटी – 3,986
• पश्चिमी सिंहभूम – 1,447
• पूर्वी सिंहभूम – 2,469
• रामगढ़ – 2,113
• रांची – 3,707
• साहेबगंज – 2,166
• सरायकेला – 2,025
• सिमडेगा – 2,072

