Ranchi : झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम लिमिटेड के बुनियादी ढांचे और मशीनरी की कीमतों को लेकर जो आंकड़े सामने आए है, वे चौंकाने वाले हैं. वितरण निगम की संपत्ति, संयंत्र और उपकरणों के मूल्य में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. यह बदलाव झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के नए नियमों के तहत किया गया है. जिसने बिजली विभाग के बैलेंस शीट की तस्वीर बदलकर रख दी है.
नया नियम : 2021 से लागू हुआ घाटे का गणित
झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग की अधिसूचना संख्या 570 के अनुसार, वितरण टैरिफ निर्धारण के लिए नए नियम तय किए गए थे. अब इसी के आधार पर एसेट्स के मूल्य ह्रास की गणना की गई है. जिसका सीधा असर निगम की वित्तीय रिपोर्टिंग और एसेट मैनेजमेंट पर पड़ रहा है. आयोग द्वारा निर्धारित आंकड़ों के अनुसार, अलग अलग संपत्तियों के लिए अलग अलग दरें तय की गई हैं. जहां जमीन और लैंड राइट्स पर मूल्य ह्रास 0 फीसदी रखा गया है. वहीं बिल्डिंग और सिविल वर्क के लिए यह दर 2.67 फीसदी तय की गई है.

प्लांट और मशीनरी व केबल नेटवर्क पर 4.22 की दर से वैल्यू कम हुई
बिजली आपूर्ति की रीढ़ माने जाने वाले प्लांट और मशीनरी तथा लाइंस एवं केबल नेटवर्क पर 4.22 फीसदी की दर से वैल्यू कम हुई है. सबसे चौंकाने वाली गिरावट मीटरों और वाहनों में देखी गई है. जहां मूल्य ह्रास की दर 12.77 फीसदी तक पहुंच गई है. इसके अलावा, फर्नीचर और ऑफिस इक्विपमेंट पर 6.33 फीसदी तथा आईटी इक्विपमेंट और सॉफ्टवेयर पर सबसे ज्यादा 15.00 फीसदी की दर से वैल्यू घट गई है. अन्य संपत्तियों के लिए सामान्यत: 4.22 फीसदी की दर निर्धारित है.
निगम की वित्तीय सेहत पर असर
मूल्य ह्रास की इन ऊंची दरों से कागजों पर निगम की संपत्ति कम होगी, लेकिन यह टैक्स और टैरिफ निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. अब देखना यह है कि एसेट्स की घटती कीमत का असर आने वाले समय में राज्य के बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर किस रूप में पड़ता है.
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