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AI के दौर में संस्कारों की जरूरत सबसे ज्यादा, हर शहर में बने डिजिटल पाठशाला: मुनि श्री भाव सागर जी

Hazaribagh: श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा बाजार मंदिर, हजारीबाग में शनिवार को विशेष मांगलिक कार्यक्रम आयोजित किया गया. यह कार्यक्रम परम पूज्य...

Hazaribagh: श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा बाजार मंदिर, हजारीबाग में शनिवार को विशेष मांगलिक कार्यक्रम आयोजित किया गया. यह कार्यक्रम परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज और मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुआ.

बच्चों को धर्म और तकनीक का सही उपयोग सिखाने पर जोर

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भाव सागर जी महाराज ने कहा कि आज का समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल तकनीक का है. ऐसे में बच्चों को अच्छे संस्कार देने के लिए देश के सभी नगरों में डिजिटल पाठशालाएं शुरू की जानी चाहिए, जहां बच्चे कहानियों और आधुनिक माध्यमों के जरिए धर्म और संस्कृति की शिक्षा प्राप्त कर सकें.

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उन्होंने कहा कि धार्मिक गतिविधियों को भी समय के साथ आधुनिक तकनीक से जोड़ने की जरूरत है. धार्मिक कार्यों में शुद्धता, अनुशासन और समय प्रबंधन का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए. बच्चों को छोटी उम्र से ही धार्मिक क्रियाएं सिखानी चाहिए ताकि धर्म और संस्कृति सुरक्षित रह सके.

मुनि श्री ने कहा कि मोबाइल, सोशल मीडिया और AI के दौर में बच्चों को संस्कार देना चुनौतीपूर्ण हो गया है. उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि वे बच्चों को समझाएं कि ऑनलाइन किसी का मजाक उड़ाना, गाली देना या अफवाह फैलाना भी हिंसा का एक रूप है. परिवार को प्रतिदिन कुछ समय साथ बैठकर आत्ममंथन और संवाद के लिए निकालना चाहिए. उन्होंने कहा कि बच्चों की हर इच्छा तुरंत पूरी करने के बजाय उन्हें धैर्य और संतोष का महत्व सिखाना चाहिए. जन्मदिन पर केवल उपहार देने की जगह मंदिर दर्शन, गोशाला सेवा और धार्मिक यात्राओं जैसे अनुभव भी देने चाहिए. इससे बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित होंगे.

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संयम और अनुशासन को बताया जीवन की सबसे बड़ी शक्ति

मुनि श्री ने परिवारों को प्रतिदिन कुछ समय “स्क्रीन-फ्री” रखने, धार्मिक अध्ययन करने और मौन साधना की आदत विकसित करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि संयम कोई बोझ नहीं बल्कि जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है, जो बच्चों को एकाग्रता और आत्मनियंत्रण सिखाती है.

उन्होंने माता-पिता से कहा कि बच्चों को केवल उपदेश देकर नहीं, बल्कि अपने आचरण से सीख देनी चाहिए. यदि माता-पिता स्वयं ध्यान, पूजा और अनुशासित जीवन अपनाएंगे तो बच्चे भी उन्हें देखकर अच्छे संस्कार ग्रहण करेंगे. संध्या में मंदिर परिसर में महाआरती का आयोजन किया गया. मीडिया हेड विजय लुहाड़िया ने बताया कि रविवार सुबह 8 बजे मुनि श्री का मंगल प्रवचन आयोजित होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है.

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