Ranchi: झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना काल में स्थापित लेकिन अब बंद पड़े पीएसए (प्रेशर स्विंग एड्सॉर्प्शन) ऑक्सीजन प्लांटों पर सख्ती शुरू कर दी है. राज्य के सरकारी अस्पतालों में ठप पड़े 54 से अधिक प्लांटों को दोबारा चालू करने और उनकी कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने बड़ा एक्शन प्लान लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. इस दिशा में झारखंड रूरल हेल्थ मिशन सोसाइटी ने राज्य के सभी 95 पीएसए प्लांटों के संचालन, मरम्मत और समग्र रखरखाव के लिए विशेषज्ञ एजेंसियों से प्रस्ताव आमंत्रित कर दिए हैं. विभाग का स्पष्ट संदेश है कि अब ऑक्सीजन आपूर्ति में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर प्लांट को तय मानकों पर ही संचालित करना होगा.
ऑक्सीजन की गुणवत्ता और प्रेशर दोनों पर होगी निगरानी
नई व्यवस्था के तहत अब सिर्फ मशीन चालू रखना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मरीजों तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की गुणवत्ता और प्रेशर दोनों पर सीधी निगरानी रखी जाएगी. प्लांट से निकलने वाली मेडिकल ऑक्सीजन की शुद्धता 93% (±3%) से कम नहीं होनी चाहिए. यदि शुद्धता में गिरावट आती है या दबाव कम होता है तो संबंधित एजेंसी पर कार्रवाई तय है. इसके साथ ही हर दिन प्लांट के संचालन, एयर कंप्रेसर, ड्रायर और अन्य उपकरणों की जांच का डिजिटल लॉग तैयार करना अनिवार्य किया गया है.
लापरवाही पर कड़े आर्थिक दंड का होगा प्रावधान
किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में ऑटोमैटिक बैकअप सिस्टम के जरिए सिलेंडर सप्लाई तुरंत शुरू करना होगा, ताकि मरीजों की ऑक्सीजन आपूर्ति प्रभावित न हो. विभाग ने पहली बार लापरवाही पर कड़े आर्थिक दंड का प्रावधान भी लागू किया है. ऑक्सीजन की गुणवत्ता मानक से कम होने और बैकअप उपलब्ध नहीं कराने पर प्रति प्लांट ₹2,000 प्रतिदिन तक का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि लॉगबुक में गड़बड़ी या सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर ₹1,000 प्रतिदिन का दंड तय किया गया है. इसके अलावा यदि कोई पीएसए प्लांट 24 घंटे से अधिक समय तक बंद रहता है तो उसे ‘क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर’ मानते हुए संबंधित एजेंसी पर सालाना अनुबंध राशि का 2% प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना काटा जाएगा.
24×7 कॉल सेंटर में शिकायत होगी दर्ज
पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए अब हर पीएसए प्लांट और बायोमेडिकल उपकरण पर QR कोड लगाया जाएगा. इसे स्कैन करते ही राज्य स्तरीय 24×7 कॉल सेंटर में शिकायत दर्ज हो जाएगी और जब तक अस्पताल के नोडल अधिकारी OTP के जरिए समस्या के समाधान की पुष्टि नहीं करेंगे, तब तक शिकायत बंद नहीं मानी जाएगी. दरअसल, कोरोना महामारी के दौरान आपातकालीन जरूरत को देखते हुए राज्यभर में इन प्लांटों की स्थापना की गई थी, लेकिन समय के साथ रखरखाव की कमी और तकनीकी खामियों के कारण बड़ी संख्या में प्लांट बंद हो गए. अब स्वास्थ्य विभाग इन्हें फिर से पूरी क्षमता के साथ चालू कर मरीजों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए सख्त कदम उठा रहा है.

इस एक्शन प्लान के लागू होने के बाद राज्य के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है और भविष्य में किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में मरीजों को ऑक्सीजन संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा.
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