Ranchi: झारखण्ड सरकार ने राज्य में विकास कार्यों को गति देने और जनसुविधाओं के विस्तार के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला लिया है. एक जून यानि सोमवार को सरकार के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी दो अलग-अलग अधिसूचनाओं के अनुसार, अब राज्य में सरकारी और सार्वजनिक उपयोग के लिए अपनी निजी को जमीन दान करने वाले भू-स्वामियों को स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस से पूरी तरह छूट दे दी गई है. इस अधिसूचना को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिलने के बाद लागू किया गया है.

किन मामलों में मिलेगी स्टाम्प और निबंधन शुल्क से पूरी छूट?
- जारी अधिसूचनाओं के मुताबिक, निम्नलिखित दो मुख्य श्रेणियों में शुल्क से शत-प्रतिशत राहत दी जाएगी.
- यदि कोई भू-स्वामी अपनी निजी भूमि झारखण्ड सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों या सरकार के किसी अन्य प्रयोजन के लिए दान करता है, तो उससे संबंधित दस्तावेजों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. इसके तहत मुख्य रूप से नागरिक सुविधाओं में वृद्धि, शहरी विकास, ग्रामीण विकास, सड़क, पार्क, पुस्तकालय आदि के निर्माण के लिए दानपत्र के माध्यम से किए जाने वाले भू-हस्तांतरण को शामिल किया गया है.
- झारखण्ड सरकार की पुनर्वास, पुनर्स्थापन नीति के तहत सरकार द्वारा चिह्नित और अधिसूचित भूमि से संबंधित दस्तावेजों पर भी स्टाम्प और निबंधन शुल्क से पूर्ण मुक्ति दी जाएगी.
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कब से प्रभावी होगा यह नियम और कैसे मिली मंजूरी?
विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि यह छूट अधिसूचना निर्गत होने की तिथि यानी एक जून 2026 से ही प्रभावी हो गई है. इस प्रस्ताव को 27 मई 2026 को आयोजित झारखण्ड मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में ‘एजेंडा संख्या-31’ के रूप में सहमति और मंजूरी मिल चुकी थी, जिसके बाद राज्यपाल के आदेश से यह अधिसूचना जारी की गई है.
किन कानूनों के तहत मिली है यह छूट?
सरकार ने इसके लिए कानूनी शक्तियों का उपयोग किया है. भारतीय मुद्रांक अधिनियम, 1899 की धारा-9 और धारा-3 के परन्तुक-(1) के तहत दी गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए स्टाम्प शुल्क निबंधन अधिनियम, 1908 की धारा-78 के अधीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए निबंधन शुल्क को पूरी तरह माफ किया गया है. सरकार के इस कदम से राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (जैसे सड़क, पार्क, लाइब्रेरी) के लिए जमीन मिलने की प्रक्रिया आसान होगी. अक्सर लोग जनहित के लिए जमीन दान करना चाहते हैं, लेकिन भारी-भरकम रजिस्ट्री और स्टाम्प खर्च की वजह से हिचकिचाते थे या प्रक्रिया में देरी होती थी.अब इस छूट के बाद दानदाताओं को कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो सकेगा.
