News Wave Desk: मई 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने पहली बार एक महीने में 23.2 अरब ट्रांजैक्शन का आंकड़ा पार कर नया इतिहास रच दिया. यह भारत में तेजी से बढ़ती नकदरहित अर्थव्यवस्था और डिजिटल भुगतान की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है.

NPCI ने जारी किए आंकड़े
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के मुताबिक, मई महीने में यूपीआई के जरिए कुल 29.90 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ. प्रतिदिन औसतन 74.8 करोड़ ट्रांजैक्शन किए गए, जबकि दैनिक लेनदेन का मूल्य करीब 96,465 करोड़ रुपये रहा.
अप्रैल की तुलना में बढ़ा कारोबार
अप्रैल 2026 में यूपीआई पर 22.35 अरब ट्रांजैक्शन और 29.03 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन दर्ज किया गया था. मई में ट्रांजैक्शन संख्या में 3.8 प्रतिशत और कुल मूल्य में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई.
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लगातार बढ़ रहा यूपीआई का इस्तेमाल
फरवरी में 20.39 अरब, मार्च में 22.64 अरब, अप्रैल में 22.35 अरब और मई में 23.2 अरब लेनदेन दर्ज किए गए. लगातार बढ़ते आंकड़े बताते हैं कि यूपीआई अब आम लोगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए सबसे पसंदीदा भुगतान माध्यम बन चुका है.
फोनपे का बाजार में दबदबा कायम
UPI बाजार में फिलहाल फोनपे सबसे आगे है. अप्रैल में कंपनी की ट्रांजैक्शन संख्या में 46.2 प्रतिशत और लेनदेन मूल्य में 49.3 प्रतिशत हिस्सेदारी रही. गूगल पे करीब 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि पेटीएम लगभग 8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे नंबर पर बना हुआ है. मई महीने के हिस्सेदारी आंकड़े अभी जारी नहीं हुए हैं. यूपीआई सेक्टर में बड़ी कंपनियों के बढ़ते वर्चस्व को लेकर छोटे फिनटेक प्लेटफॉर्मों की चिंता भी बढ़ रही है. अमेज़न पे, क्रेड, नवी, मोबिक्विक और सुपर.मनी समेत कई कंपनियों ने हाल ही में NPCI के साथ बैठक कर प्रतिस्पर्धा को संतुलित बनाने के उपायों पर चर्चा की. हालांकि अभी तक किसी बड़े नियामकीय बदलाव की घोषणा नहीं की गई है.
