रांची: कानून की नजर में अपराध कभी पुराना नहीं होता, खासकर जब मामला महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा हो. हाल के कई अदालती फैसलों और कानूनी प्रावधानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी व्यक्ति ने 10 साल पहले भी किसी लड़की के साथ छेड़छाड़ या गलत हरकत करने की कोशिश की है, तो उसे आज भी जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा सकता है.

देरी से FIR दर्ज होना अब बाधा नहीं:
अक्सर यह माना जाता था कि अगर घटना के तुरंत बाद रिपोर्ट दर्ज न कराई जाए, तो केस कमजोर हो जाता है. लेकिन भारतीय अदालतों ने अब इस सोच को बदल दिया है. सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट्स ने माना है कि सामाजिक दबाव और डर पीड़िता अक्सर शर्म, सामाजिक बदनामी या आरोपी के डर से तुरंत शिकायत नहीं कर पाती. पीड़िता के बयान विश्वसनीय हैं और साक्ष्य मौजूद हैं, तो घटना के 10-15 साल बाद भी आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है.
इन धाराओं के तहत चलता है मुकदमा:
– यदि मामला छेड़छाड़ और गलत प्रयास का है, तो कानून में सख्त प्रावधान हैं:
– BNS की धारा 74: महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग.
– BNS की धारा 62: दुष्कर्म का प्रयास करना. इसमें उम्रकैद तक की आधी सजा का प्रावधान है.
– यह उन अपराधियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो सोचते हैं कि समय बीतने के साथ उनका गुनाह दब गया है. कानून स्पष्ट है, महिलाओं के खिलाफ किए गए अपराध का हिसाब वक्त नहीं, बल्कि अदालत करती है.

