Chakradharpur: गुवा सेल खदान से प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग 500 स्थानीय लोगों को अबतक रोजगार नहीं दिया गया है, वहीं 72 युवकों को काम से हटाए जाने के बाद दोबारा बहाल नहीं किया गया. ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर 13 फरवरी को धरना-प्रदर्शन करते हुए पहला ज्ञापन सौंपा था. इसके बाद 27 फरवरी को पुनः चार घंटे का धरना देकर अपनी मांगों को दोहराया गया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका. विरोध के क्रम में 15 अप्रैल से 17 अप्रैल तक ग्रामीणों ने भूख हड़ताल भी की, परंतु इसके बावजूद प्रबंधन की ओर से सकारात्मक पहल नहीं हुई. आक्रोशित ग्रामीणों ने 20 अप्रैल को गुवा सेल जनरल ऑफिस के सामने अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुरू कर दिया. इस दौरान प्रशासन और सेल प्रबंधन ने वार्ता का आश्वासन दिया, जिसके आधार पर आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया था.
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वार्ता में रोजगार और विस्थापन के मुद्दे उठाए गए
इसी कड़ी में 5 मई 2026 को सेल प्रबंधन द्वारा वार्ता के लिए बुलाया गया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने भाग लिया. वार्ता के दौरान रोजगार, विस्थापन और प्रदूषण जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया. ग्रामीणों का कहना है कि खदान से निकलने वाले कचरे और प्रदूषण के कारण उनकी जमीन बंजर होती जा रही है. जलस्रोत दूषित हो रहे हैं और पशु-पक्षियों के साथ-साथ ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है. हालांकि, इस वार्ता में भी सेल प्रबंधन ने ग्रामीणों की मांगों को मानने से इंकार कर दिया, जिससे ग्रामीणों में भारी असंतोष व्याप्त है. बैठक में मांगता सोरेन, सुरेश चाम्पिया, सारंडा पीठ मानकी, मंगल पुर्ति, डुरसु चंपिया, गोकुल देवगम, निर्मल पूर्ति, सिंगा सुरीन, दामू चंपिया, कानुराम देवगम, बिरसा सुरीन एवं मनचुइया सिंकू सहित कई प्रतिनिधि मौजूद रहे, वहीं हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने भागीदारी निभाई. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो वे फिर से आंदोलन शुरू करेंगे और चरणबद्ध तरीके से इसे उग्र रूप देंगे. उन्होंने साफ कहा कि इसके लिए पूरी जिम्मेदारी सेल प्रबंधन की होगी.
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