शुभेंदु सरकार का अहम फैसला: भारत-बांग्लादेश सीमा पर BSF को सौंपी गई 32 एकड़ जमीन, घुसपैठ पर लगाम लगाने की तैयारी

Important decision of the Shubhendu government: भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बड़ा कदम...

Important decision of the Shubhendu government: भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को लगभग 32 एकड़ जमीन सौंप दी है. पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने बुधवार को राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जमीन देने की यह प्रक्रिया पिछले कई वर्षों से रुकी हुई थी. मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि सरकार ने कई सीमावर्ती जिलों में स्थायी सीमा चौकियां बनाने और बाड़ लगाने के काम के लिए जमीन देने के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट की पहली बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार, सरकार ने बांग्लादेश सीमा के साथ नौ अलग-अलग स्थानों पर कुल 31.905 एकड़ जमीन बीएसएफ को दी है.

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बाड़ और सीमा पर चौकियां बनाने के लिए कुछ और प्रस्ताव

इसके साथ ही, भूमि और भूमि सुधार विभाग ने कैबिनेट के सामने कुछ और नए प्रस्ताव भी रखे हैं. इनमें मालदा, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार जिलों में 1.53 एकड़ जमीन देने की बात कही गई है. इस जमीन का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तीन अलग-अलग जगहों पर स्थायी सीमा चौकियां बनाने के लिए होगा. इसके अलावा, उत्तर दिनाजपुर जिले में 11 स्थानों पर 12.72 एकड़ जमीन देने का एक और प्रस्ताव है. इससे सीमा पर बाड़ लगाने के काम में काफी मदद मिलेगी.

पिछली सरकार की हाईकोर्ट ने की थी आलोचना

सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन देने का यह मामला राज्य में लंबे समय से विवादों में रहा था. इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित करने के लिए जमीन देने में हो रही देरी पर पिछली सरकार की कड़ी आलोचना भी की थी. पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर विचार किया है. इसके तहत जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा में 20 एकड़ सरकारी जमीन वन विभाग को दी जाएगी. इसके बाद वन विभाग इस जमीन को सेवक-रंगपो रेलवे लाइन प्रोजेक्ट के काम के लिए सौंप देगा. इस तरह सरकार ने सीमा सुरक्षा के साथ-साथ रेल परियोजना के लिए भी जमीन का रास्ता साफ कर दिया है.

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