वन विभाग ने लगाये 1.92 करोड़ पौधे, नदी तटों से लेकर शहरों तक हुआ पौधारोपण, ऑडिट रिर्पोट में हुआ खुलासा

Ranchi : वन विभाग ने आधिकारिक वनरोपण स्थल सूची जारी कर दी है. पूरे राज्य में कुल 1,92,00,591 ( लगभग 1.92 करोड़...

Ranchi :  वन विभाग ने आधिकारिक वनरोपण स्थल सूची जारी कर दी है. पूरे राज्य में कुल 1,92,00,591 ( लगभग 1.92 करोड़ ) पौधे रोपकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है. ऑडिट के अनुसार, कई जिलों में पौधों के जीवित रहने की दर ( सर्वाइवल रेट ) 95 फीसदी से 100 फीसदी तक पाई गई है.

जीपीएस ट्रैकिंग और उत्तरजीविता ऑडिट

इस बार के अभियान की सबसे खास बात यह रही कि कागजों के बजाय धरातल पर काम को सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने हर एक वनरोपण स्थल की जीपीएस को ऑर्डिनेट्स के साथ मैपिंग की है. भौतिक सत्यापन और ऑडिट में सामने आया है कि इस साल लगाए गए पौधों की देखभाल बहुत कड़ाई से की जा रही है. साहेबगंज, दुमका, देवघर, जामताड़ा और चतरा जैसे जिलों में पौधों की सुरक्षा इतनी पुख्ता रही कि वहां सर्वाइवल रेट शत प्रतिशत तक दर्ज किया गया है.

फैक्ट फाइल

  • कुल रोपे गए पौधे 1,92,00,591 ( 1.92 करोड़ )
  • कुल कवर किया गया क्षेत्र ( हेक्टेयर में ) 21,075 हेक्टेयर
  • कुल कवर किया गया क्षेत्र ( एकड़ में ) 3,373.16 एकड़
  • नदी तट और रैखिक सुरक्षा 202 किलोमीटर
  • सुरक्षा के लिए लगाए गए कुल गैबियन ( ट्री-गार्ड ) 4,41,722 यूनिट

योजनावार उपलब्धियां : कहां और कैसे रोपे गए पौधे

  • नदी तटों का संरक्षण : 190 किमी में फैली हरियाली
  • नदियों के कटाव को रोकने और जलस्तर को बनाएं रखने के लिए झारखंड की प्रमुख नदियों के किनारों पर बड़े पैमाने पर कंटीले तारों की घेराबंदी कर वृक्षारोपण किया गया.
  • तटीय लंबाई : 190 किलोमीटर
  • रोपे गए पौधे : 5,69,340
  • गढ़वा, लातेहार ( औरंगा नदी ), हजारीबाग, कोडरमा और धनबाद जैसे प्रमंडलों में पौधों की उत्तरजीविता 98 फीसदी से 100 फीसदी तक दर्ज की गई है. रांची प्रमंडल के मांडर – बुढ़मू रोड पर भूर नदी तट पर यह दर 82 फीसदी रही.

अधिसूचित वन भूमि के बाहर वृक्षारोपण : गांवों और खाली जमीनों पर जोर

  • जंगलों की सीमा से बाहर : आम नागरिकों और गैर-वन भूमि तक हरियाली का विस्तार करने के लिए इस योजना को चलाया गया.
  • बांस गैबियन (ट्री-गार्ड) में रोपण : 2,21,750 पौधे
  •  गैर-वन भूमि पर रोपण : 1,600 हेक्टेयर क्षेत्र में 26,65,300 पौधे
  •  कुल योग : 28,87,050 पौधे लगाकर वनों से बाहर भी ग्रीन कवर बढ़ाया गया.

अवकृष्ट वनों का पुनर्वास एवं भू-संरक्षण

इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन वन भूमियों को फिर से जीवित करना था. जो समय के साथ अपनी हरियाली खो चुकी थीं. यह इस साल का सबसे बड़ा पौधरोपण अभियान साबित हुआ.
  • कुल कवर एरिया : 10,255 हेक्टेयर वन भूमि
  • कुल रोपे गए पौधे : 1,29,28,930 (करीब 1.29 करोड़)
  • अवकृष्ट वनों का पुनर्वास : 7,250 हेक्टेयर में 72,50,000 पौधे.
  • सामान्य वन भूमि पर रोपण : 2,855 हेक्टेयर में 47,56,430 पौधे.
  • शीशम का विशेष वृक्षारोपण :150 हेक्टेयर में 9,22,500 पौधे.

शहरी वानिकी योजना (अर्बन फॉरेस्ट्री)

शहरी इलाकों में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और शहरों की पहाड़ियों को हरा-भरा करने के लिए इस योजना के तहत खास फोकस किया गया. शहरों में पौधों को सुरक्षित रखने के लिए महंगे और मजबूत गार्ड्स का इस्तेमाल हुआ.
  •  पीवीसी जाली निर्मित गैबियन में रोपण : 1,69,400 पौधे
  • बांस गैबियन में रोपण : 50,572 पौधे
  • कुल योग : शहरी क्षेत्रों में कुल 2,19,972 पौधे लगाए गए

सिल्वीकल्चरल ऑपरेशन योजना

वनों के प्राकृतिक पुनर्जनन और जल-मृदा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से काम किया गया.
  • कवर किया गया क्षेत्र : 9,220 हेक्टेयर
  •  रोपे गए पौधे : 16,66,200 पौधे

मुख्यमंत्री जन-वन योजना

आम जनता और किसानों को अपनी निजी और रैयती जमीनों पर पौधे लगाने के लिए इस योजना के जरिए प्रोत्साहित और लाभांवित किया गया. इसमें लकड़ी और फल दोनों तरह के पेड़ों पर ध्यान दिया गया.
  •  कुल कवर एरिया : 3,373.16 एकड़
  •  कुल रोपे गए पौधे : 9,26,099
  •  काष्ठ (इमारती लकड़ी वाले पेड़) : 6,28,551 पौधे
  •  फलदार पौधे : 2,97,548 पौधे

वन्यप्राणी संरक्षण एवं अपराध नियंत्रण

 इस विशेष योजना के तहत वन्यजीवों के क्षेत्रों और उनके मुख्य मार्गों के किनारों को सुरक्षित करने का प्रयास किया गया.
  •  रैखिक सड़क किनारा रोपण : 12 किलोमीटर (बांस गैबियन के साथ)
  • रोपे गए पौधे : 3,000 पौधे

 

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