टांगीनाथ धाम: झारखंड की आस्था, इतिहास और रहस्य का अद्भुत संगम

Newsdesk: झारखंड के गुमला जिले के डुमरी प्रखंड स्थित टांगीनाथ धाम राज्य के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और पुरातात्विक स्थलों में से एक...

Newsdesk:  झारखंड के गुमला जिले के डुमरी प्रखंड स्थित टांगीनाथ धाम राज्य के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और पुरातात्विक स्थलों में से एक माना जाता है. लगभग 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह प्राचीन शिव धाम न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के लिए भी आकर्षण का विषय बना हुआ है.

 

भगवान शिव और परशुराम से जुड़ी है मान्यता

 

स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक टांगीनाथ धाम का संबंध भगवान परशुराम से माना जाता है. कहा जाता है कि उन्होंने इसी स्थान पर भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी. मान्यता है कि तपस्या पूरी होने के बाद उन्होंने अपना फरसा (टांगी) यहां भूमि में स्थापित कर दिया था. इसी कारण इस स्थान का नाम “टांगीनाथ” पड़ा.

रहस्य बना हुआ है विशाल त्रिशूल

 

टांगीनाथ धाम की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित विशाल लोहे का त्रिशूल है. यह त्रिशूल वर्षों से खुले आसमान के नीचे धूप, बारिश और मौसम की मार झेल रहा है, लेकिन इसमें जंग नहीं लगने की बात लोगों के बीच आश्चर्य और आस्था का विषय बनी हुई है. यही कारण है कि इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं.

प्राचीन मंदिरों और मूर्तियों का खजाना

टांगीनाथ परिसर लगभग 10 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है. यहां सैकड़ों शिवलिंग, भगवान विष्णु, सूर्य, लक्ष्मी, गणेश, दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां मौजूद हैं. मंदिर परिसर में बिखरे अवशेष इस क्षेत्र की समृद्ध स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत की कहानी बताते हैं.

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7वीं से 12वीं शताब्दी के बीच का इतिहास

विशेषज्ञों के मुताबिक यहां मौजूद मंदिरों और मूर्तियों का काल 7वीं से 12वीं शताब्दी के बीच का माना जाता है. कुछ पुरातात्विक अध्ययनों में इसे 11वीं-12वीं शताब्दी की महत्वपूर्ण धरोहर बताया गया है. परिसर में मिले शिलालेख और कलाकृतियां इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को और मजबूत करती हैं.

महाशिवरात्रि पर उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

महाशिवरात्रि और सावन के दौरान टांगीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. हर वर्ष झारखंड के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं. महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेला भी लगता है.

धार्मिक पर्यटन की बड़ी संभावनाएं

धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के बावजूद टांगीनाथ धाम को अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर वह पहचान नहीं मिल पाई है, जिसका यह हकदार है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहां पर्यटन सुविधाओं, सड़क संपर्क और संरक्षण कार्यों को और विकसित किया जाए, तो यह स्थल झारखंड के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है.

टांगीनाथ धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि झारखंड की प्राचीन संस्कृति, इतिहास, आस्था और रहस्यमयी विरासत का जीवंत प्रतीक है, जो हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है.

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