Manish Bhardwaj

Ranchi: झारखंड में जल जीवन मिशन (JJM), DMFT और स्टेट प्लान के तहत संचालित करोड़ों रुपये की ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं में भारी देरी और सुस्त कार्य प्रगति को लेकर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की चिंता अब खुलकर सामने आने लगी है. विभाग के अभियान निदेशक शशि रंजन द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि संवेदक श्रीराम ईपीसी द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति अत्यंत धीमी है, जबकि कई परियोजनाओं का काम लगभग ठप पड़ चुका है.
विशेष समीक्षा बैठक बुलाई गई
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभागीय सचिव की अध्यक्षता में विशेष समीक्षा बैठक बुलाई गई थी. पत्र में चाईबासा, हजारीबाग, चतरा, धनबाद, देवघर और मधुपुर समेत कई प्रमंडलों के अभियंताओं को विस्तृत प्रतिवेदन के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था. खास बात यह है कि पत्र में श्रीराम ईपीसी द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा को बैठक का मुख्य एजेंडा बनाया गया था.
कंपनी का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा
लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिस कंपनी की योजनाओं की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई गई थी, उसी श्रीराम ईपीसी का कोई भी अधिकारी बैठक में उपस्थित नहीं हुआ. इससे विभागीय कार्यप्रणाली और एजेंसी की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. विभाग के भीतर यह चर्चा है कि जब करोड़ों रुपये की योजनाओं की प्रगति पर सवाल उठ रहे हों और विभाग स्वयं समीक्षा बैठक बुला रहा हो, तब संबंधित एजेंसी के अधिकारियों का अनुपस्थित रहना उनके रवैये को दर्शाता है.
लक्ष्य के मुकाबले बेहद कम उपलब्धि
विभाग के आधिकारिक दस्तावेज बताते हैं कि श्रीराम ईपीसी को विभिन्न जिलों में लगभग 2.42 लाख घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) उपलब्ध कराने का लक्ष्य दिया गया था. इसके मुकाबले मार्च 2026 तक केवल 33,556 कनेक्शन ही दिए जा सके, जो कुल लक्ष्य का करीब 14 प्रतिशत है. सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी को आवंटित प्रमुख योजनाओं में से एक भी योजना अब तक पूरी तरह पूर्ण नहीं हो सकी है.
कई बड़ी योजनाएं अब भी अधूरी
चाईबासा की आइता और पुराना चाईबासा जलापूर्ति योजना, तांतनगर फुल ब्लॉक कवरेज योजना, हजारीबाग के चौपारण और बरही क्षेत्र की योजनाएं, चतरा की टंडवा योजना, धनबाद की गोविंदपुर-निरसा मल्टी विलेज योजना और मधुपुर की मारगोमुंडा मेगा RWSS जैसी कई परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं. कई योजनाओं में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नल कनेक्शन की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है.
विभागीय पत्र में भी जताई गई चिंता
विभाग द्वारा जारी पत्र में भी उल्लेख किया गया है कि संवेदक द्वारा कार्यों में अपेक्षित रुचि नहीं लेने के कारण जलापूर्ति जैसी आवश्यक जनसेवा प्रभावित हो रही है और विभाग की छवि भी धूमिल हो रही है. यही वजह है कि अधिकारियों से अद्यतन रिपोर्ट मांगी गई थी.
पहले भी विवादों में रही है कंपनी
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि श्रीराम ईपीसी का रिकॉर्ड पहले भी विवादों में रहा है. तांतनगर जलापूर्ति योजना में अनियमितताओं और कार्य निष्पादन में गंभीर खामियों के आरोपों के बाद कंपनी को डिबार किया गया था. बाद में उसे डिबार सूची से हटाकर फिर से लगभग 800 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का कार्य सौंपा गया. अब उन्हीं परियोजनाओं की खराब प्रगति विभाग के लिए बड़ी परेशानी बनती दिख रही है.
धनबाद परियोजनाओं पर भी उठे सवाल
धनबाद क्षेत्र की परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर JUIDCO भी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है. कंपनी को दिए गए कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान और वास्तविक प्रगति की जांच अलग-अलग स्तरों पर चल रही है. कई मामलों में भुगतान और भौतिक प्रगति के बीच अंतर की शिकायतें भी सामने आई हैं.
अधिकारियों ने साधी चुप्पी
समीक्षा बैठक के बाद जब अभियान निदेशक जल जीवन मिशन, शशि रंजन से इस संबंध में प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने कहा कि मामला सचिव के पास है, इसलिए वह इस पर कुछ नहीं बोल सकते. सूत्रों के अनुसार अधिकारियों को इस मामले में बोलने से मना किया गया है. विभागीय सचिव से संपर्क करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन बैठक में व्यस्त होने के कारण बातचीत नहीं हो सकी.
