Ranchi: पूर्व त्यागी विधायक और आजसू के संस्थापक सूर्य सिंह बेसरा ने आदिवासी को वनवासी कहे जाने पर पुरजोर विरोध जताते हुए 25 जून को दिल्ली चलो का आह्वाहन किया है. दरअसल, दिल्ली में आयोजित ‘जनजातीय महाकुंभ’ में गृह मंत्री अमित शाह ने आदिवासी को वनवासी कहा था, जिसके बाद आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश देखने को मिला और उसके बाद से ही सभी आदिवासी एकजुट होकर केंद्र सरकार और अमित शाह के खिलाफ लगातार प्रदर्शन करते रहे हैं. पूर्व मंत्री सूर्य सिंह बेसरा ने भी इसका पुरजोर विरोध किया था और आदिवासियों के संरक्षण के लिए उन्होंने एक आंदोलन करने का ठाना है. सूर्य सिंह बेसरा ने आदिवासियों से 25 जून को दिल्ली चलो का आह्वाहन किया है. उनके द्वारा आदिवासियों से आग्रह किया गया कि “25 जून को दिल्ली चलो और जंतर-मंतर में चिंतन-मंथन करेंगे”. उनका कहना है कि दिल्ली जाकर वे महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलेंगे और उन्हें याद दिलाने का काम करेंगे कि वो भी एक आदिवासी हैं.
राष्ट्रपति के समक्ष रखी जाएंगी 5 प्रमुख मांगें
- संविधान के अनुच्छेद 25 के प्रावधानों के तहत भारत में लगभग 700 आदिवासी समुदाय एवं 15 करोड़ आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड अधीन किया जाए.
- संविधान के अनुच्छेद 342 में “अनुसूचित जनजाति” के स्थान पर “आदिवासी” शब्द का उल्लेख किया जाए.
- छठवीं अनुसूची की तरह पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में परिसीमन लागू ना किया जाए.
- देश और दुनिया की आबादी निरंतर बढ़ रही है, उसके विपरीत आदिवासियों की जनसंख्या तथा लोकसभा और विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व घटता जा रहा है. आखिर क्यों?
- 9 अगस्त, विश्व आदिवासी दिवस को राष्ट्रीय महोत्सव घोषित किया जाए और साथ ही कहा गया है कि इतिहास की पुनरावृत्ति के लिए आदिवासियों को विवश ना किया जाए.
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वनवासी शब्द का किया विरोध
उनका साफ कहना है कि वनवासी और सनातन शब्द उनके लिए श्राप के जैसा है और उनका कहना है कि आदिवासी भारत के असली मालिक और भूमिपुत्र हैं.


