Ranchi: झारखंड की सियासी पिच पर राज्यसभा चुनाव का मुकाबला अब ‘टेस्ट मैच’ से सीधे ‘टी-20’ मोड में आ चुका है. बिजनेसमैन परिमल नथवानी ने निर्दलीय पर्चा क्या भरा, मानो राजनीति के सारे पुराने सूरमाओं के गणित धरे के धरे रह गए. कल तक जो कांग्रेस अपनी जीत के दावे ठोक रही थी, आज उसके रणनीतिकार उंगलियों पर विधायकों की संख्या गिनते-गिनते पसीना बहा रहे हैं. दिल्ली दरबार से हरी झंडी और भाजपा का ‘कवच’ लेकर लौटे नथवानी के लिए अब दिल्ली दूर नहीं दिख रही, जबकि कांग्रेस के लिए अपने ही कुनबे को समेटना किसी हिमालयी टास्क से कम नहीं है.

गोटी सेट करके लौटे परिमल नथवानी
कहानी में ट्विस्ट तब आया जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने साफ कह दिया था कि भाई, हम प्रस्तावक नहीं बनेंगे. परिमल नथवानी ने बुरा नहीं माना; वो सीधे दिल्ली उड़े, दिनभर गोटी सेट की और शाम होते-होते भाजपा का खुला समर्थन अपनी जेब में डाल लिया. अब समीकरण यह है कि भाजपा के साथ आने के बाद उन्हें जीत के लिए महज 4 चमत्कारी वोटों की दरकार है. राजनीति के जानकारों की मानें तो कॉरपोरेट की दुनिया में बड़े-बड़े सौदे चुटकियों में करने वाले नथवानी के लिए 4 विधायकों का दिल जीतना बाएं हाथ का खेल है.
कांग्रेस के एकजुटता की अग्निपरीक्षा
इधर, असली आफत कांग्रेस के पाले में है. अब चुनौती सिर्फ प्रणव झा को जिताने की नहीं, बल्कि 18 जून को वोटिंग के दिन यह साबित करने की है कि उनके 16 के 16 विधायक एकजुट हैं. अगर एक भी वोट इधर-उधर खिसका, तो दिल्ली से लेकर रांची तक कांग्रेस की जो फजीहत होगी, उसका सीधा असर सूबे की सरकार की सेहत पर पड़ना तय है.
जेएमएम की स्मार्ट चाल
दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही कांग्रेस को समझा रहे थे कि जिद छोड़ो, दोनों सीटें जेएमएम को लड़ने दो. लेकिन कांग्रेस अपनी जिद पर अड़ी रही. जेएमएम ने भी समझदारी दिखाई. न नथवानी के प्रस्तावक बने, न कांग्रेस से सीधा बैर लिया. नतीजा यह है कि आज मुख्यमंत्री आवास में भूपेश बघेल और अजय शर्मा जैसे भारी-भरकम पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में गठबंधन की बैठक तो हो रही है, लेकिन अंदरखाने जेएमएम, राजद और यहां तक कि भाजपा के विधायकों के चेहरे की मुस्कान बता रही है कि परिमल नथवानी के इस मास्टरस्ट्रोक से असली सस्पेंस किसके घर में बढ़ा है.
