Lohardaga: उपायुक्त संदीप कुमार मीना की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक हुई. बैठक में सर्वप्रथम राज्यभर में अप्रैल माह 2026 तक लोहरदगा जिला की स्थिति की समीक्षा की गई और लगातार बेहतर की ओर प्रयासरत रहने के निर्देश दिए गए.
परीक्षा परिणामों की समीक्षा
झारखंड अधिविद्य परिषद, रांची द्वारा इस वर्ष आयोजित 10वीं बोर्ड और 12वीं इंटरमीडिएट (साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स) की परीक्षा में लोहरदगा जिला के प्रदर्शन की समीक्षा उपायुक्त द्वारा की गई और प्रदर्शन में लगातार सुधार करने के निर्देश दिए गए. इंटरमीडिएट साइंस विषय के परिणाम पर असंतोष व्यक्त किया गया और कमजोर प्रदर्शन वाले विषयों में विशेष कक्षाएं आयोजित करने का निर्देश जिला शिक्षा पदाधिकारी को दिया गया.

विद्यालयों की उपस्थिति पर सख्ती
उपायुक्त ने कहा कि जिन विद्यालयों में फरवरी से अप्रैल माह तक छात्र-छात्राओं की उपस्थिति कम रही है या उपस्थिति दर्ज नहीं की गई है उन विद्यालयों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया. इसी प्रकार जिन विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति कम रही है या वे लगातार अनुपस्थित रहे हैं उन पर भी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया.
छात्रों की सीखने की क्षमता की समीक्षा
बैठक में पलाश कार्यक्रम के जरिए छात्र-छात्राओं की सीखने की क्षमता की समीक्षा की गई. पढ़ने, लिखने, डिक्टेशन, संख्या पहचानने की क्षमता, गणित की समस्याएं हल करने की क्षमता और पढ़ने की गति जैसे बिंदुओं पर प्रदर्शन असंतोषजनक पाया गया. इन सभी बिंदुओं पर सुधार करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.
आधार और अपार आईडी अपडेट
छात्र-छात्राओं के आधार और अपार आईडी की स्थिति की समीक्षा की गई और सभी नामांकित छात्रों की अपार आईडी जनरेट करने का निर्देश दिया गया. जिनका आधार नहीं बना है या सुधार की आवश्यकता है उनके लिए शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया गया. जुलाई माह तक सभी लंबित अपार आईडी पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया.
मध्याह्न भोजन और मॉनिटरिंग
सभी विद्यालयों में नामांकन के अनुसार मध्याह्न भोजन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. मध्याह्न भोजन की एसएमएस आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली को भी लागू करने पर जोर दिया गया.
BPO को निर्देश
सभी बीपीओ को नियमित रूप से विद्यालयों का भ्रमण करने और आवश्यक रिपोर्टिंग करने का निर्देश दिया गया. जहां शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति कम है वहां तुरंत सूचना देने को कहा गया.
स्वास्थ्य और शैक्षणिक सुधार
विद्यालयों में नियमित स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया गया. साथ ही राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की गतिविधियों को प्रभावी रूप से संचालित करने पर जोर दिया गया.
