News Wave Expose : सरकारी विभागों में 25.68 करोड़ के डीसी बिल लंबित, एडवांस में ली गई राशि का अभी तक हिसाब किताब नहीं

Ranchi : झारखंड के सरकारी महकमों में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं....

Ranchi : झारखंड के सरकारी महकमों में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. राज्य वित्त विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न कोषागारों में कुल 25,68,22,664 के डीसी बिल लंबित पड़े हैं. सरकारी नियमों के तहत एडवांस में ली गई इस राशि का तय समय सीमा के भीतर हिसाब नहीं दिया गया है. इस वित्तीय सुस्ती में गृह विभाग अकेले सबसे आगे खड़ा है.

क्या होता है डीसी बिल

सरकारी व्यवस्था में आपातकालीन खर्चों, योजनाओं के त्वरित संचालन या विशिष्ट आयोजनों के लिए विभागों को बिना किसी विस्तृत वाउचर के अग्रिम राशि निकालने की अनुमति होती है. इस प्रारंभिक निकासी को डीसी बिल कहा जाता है.नियमतः, इस एडवांस राशि को खर्च करने के बाद संबंधित विभाग को सभी मूल वाउचर, रसीदें और खर्च का पूरा विवरण तैयार कर कोषागार को सौंपना होता है.इस अंतिम और सत्यापित ब्यौरे को ही डीसी बिल कहते हैं. यह बिल इस बात का कानूनी और वित्तीय प्रमाण होता है कि जनता का पैसा सही जगह खर्च हुआ है. इसके लंबित रहने का मतलब है कि कागजी तौर पर इस खर्च का समायोजन अभी तक नहीं हो सका है.

विभागवार लंबित बिलों का लेखा जोखा

गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग (गृह प्रभाग) : वित्तीय सुस्ती के मामले में यह विभाग सबसे ऊपर है. पुलिस मुख्यालय के स्तर से कुल 4 ऐसी बिलों के डीसी बिल अटके हुए हैं. इनकी सामूहिक राशि 22.35 करोड़ से अधिक है. इसमें तीन बड़े बिल क्रमशः 12,35,96,693, 5,99,99,650, और 2,39,99,724 के हैं. जबकि एक बिल 1,59,99,404 का है.

स्वास्थय, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग : इस विभाग के तहत कुल 3.14 करोड़ से अधिक के बिल लंबित हैं. इसमें सबसे बड़ा मामला जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के स्तर पर 1,05,00,000 (1.05 करोड़ रुपये) का है. इसके अलावा लातेहार में 34 लाख व 30 लाख, सरायकेला में 40 लाख, रामगढ़ में 34.47 लाख, चतरा में 29 लाख और गोड्डा में 19.68 लाख के डीसी बिल पेंडिंग हैं.

ग्रामीण विकास विभाग : प्रोजेक्ट भवन कोषागार में अवर सचिव अमरीश कुमार के स्तर पर कुल 1.91 करोड़ के दो बिल (क्रमशः 95,67,430 और 95,67,431) लंबित हैं. इसके अतिरिक्त गुमला कोषागार में डीडीसी कार्यालय का 8.06 लाख का एक बिल बकाया है.

कैबिनेट सचिवालय एवं सतर्कता विभाग (नागरिक उड्डयन प्रभाग) : प्रोजेक्ट भवन कोषागार में इस विभाग के अनुभाग अधिकारी के स्तर पर 16,28,627 का डीसी बिल पेंडिंग है.

वाणिज्य कर विभाग : व्यावसायिक कर विभाग के तहत समीक्षा अधिकारी-सह-डीडीओ के कोड पर 8,39,011 का समायोजन होना अभी शेष है.

 

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