Ranchi : झारखंड में राज्यसभा चुनाव की तारीखें क्या नजदीक आईं, सियासत का पारा थर्मामीटर तोड़कर बाहर निकल गया है. निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी का नामांकन क्या हुआ, ऐसा लग रहा है कि दोनों तरफ के सूरमाओं को अपनी-अपनी पॉलीटिकल टॉनिक मिल गई है. कांग्रेस के थिंक-टैंक और दिग्गज कानूनी दांवपेच के उस्ताद सलमान खुर्शीद साहब बड़े अरमानों के साथ विधानसभा की चौखट पर पहुंचे. सोचा होगा कि अपनी दलीलों से समां बांध देंगे. यहां दिल्ली के कायदे नहीं, यहां के अपने’वायदे चलते हैं. खुर्शीद साहब को दरवाजे पर ही ऐसे रोक दिया गया. जैसे कोई बिना टिकट का यात्री प्लेटफॉर्म पर पकड़ लिया गया हो. वह बहस में शामिल नहीं हो सके.मंत्री इरफान अंसारी तो इतने नाराज हुए कि उन्होंने सीधे रिमोट कंट्रोल’ की थ्योरी दे डाली. उन्होंने साफ कह दिया कि निर्वाचन आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है.
दंगल का नया एंगल
इस बार ड्रामा सिर्फ अंदरूनी कमरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे सड़क और गेट पर उतर आया है. अमूमन विधानसभा के अंदर जनता के मुद्दों पर जो सन्नाटा पसरा रहता है. वह बाहर कार्यकर्ताओं के चीखने-चिल्लाने से टूट गया. कांग्रेस को लग रहा है कि उनके साथ धोखा हो गया है. वहीं भाजपा अचानक से एक निर्दलीय उम्मीदवार की ढाल बनकर खड़ी हो गई है. कांग्रेस का गुस्सा वैसे बेवजह भी नहीं है. उनका दर्द है कि मध्य प्रदेश में जब मीनाक्षी नटराजन के नामांकन में सुई के बराबर खामी दिखी, तो आयोग ने आव देखा न ताव, सीधे पत्ता साफ कर दिया. लेकिन झारखंड में जब परिमल नाथवानी के पर्चे में ‘खामी दिखा तो उन्हें दूर करने के लिए बकायदा ‘ग्रेस पीरियड’ दे दिया गया.

भाजपा की नाराजगी
कहानी में ट्विस्ट तब आया जब इस हंगामे के बीच भाजपाई की भी एंट्री हो गई. बीजेपी विधायक सीपी सिंह गेट संख्या 2 पर सुरक्षा का ऐसा पहरा देखकर लाल-पीले हो गए. उनका लॉजिक भी कड़क था कहा कि कांग्रेस वाले अंदर जाकर पिकनिक मना रहे हैं और हमारे कार्यकर्ताओं को गेट पर ही ‘स्टॉप’ बोल दिया गया है. यह भेदभाव नहीं चलेगा. सीपी सिंह ने तुरंत अपनी डायरी निकाली और कहा कि इसकी लिखित शिकायत वह सीधे सचिव से करेंगे.
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