Hazaribagh: नगर निगम में कार्यरत वार्ड जमादार दीपक कुमार के गंभीर रूप से बीमार होने के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. अखिल भारतीय मजदूर संगठन ने नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा है कि एक कर्मचारी का परिवार इलाज के लिए महाजनों और सूदखोरों से कर्ज लेने को मजबूर हो गया है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है.
ड्यूटी के दौरान बिगड़ी तबीयत, 15 दिनों से अस्पताल में भर्ती
मजदूर संगठन के अनुसार वार्ड जमादार दीपक कुमार नगर निगम में सफाई व्यवस्था के साथ-साथ बीएलओ एवं जनगणना जैसे अतिरिक्त कार्यों का भी निर्वहन कर रहे थे. इसी दौरान उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ, जिसके बाद से वे पिछले 15 दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं और गंभीर स्थिति में जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं.

इलाज के लिए सूदखोरों से कर्ज लेने का आरोप
संगठन के अध्यक्ष विवेक कुमार वाल्मीकि ने आरोप लगाया कि दीपक कुमार का परिवार पहले से आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. अब इलाज का खर्च उठाने के लिए उन्हें भारी ब्याज पर कर्ज लेना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक सरकारी कर्मचारी का परिवार इलाज के लिए महाजनों और सूदखोरों के सामने हाथ फैलाने को विवश है.
महापौर और नगर आयुक्त की चुप्पी पर सवाल
मजदूर संगठन ने महापौर और नगर आयुक्त की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. संगठन का कहना है कि अब तक न तो इस मामले में कोई विशेष बैठक बुलाई गई और न ही पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता या मुआवजा देने की दिशा में कोई ठोस पहल की गई है. विवेक कुमार वाल्मीकि ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी के साथ ड्यूटी के दौरान ऐसी घटना होती है तो प्रशासन की नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी बनती है कि वह परिवार के साथ खड़ा हो, लेकिन यहां स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है.
कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता
जहां प्रशासन पर उदासीनता के आरोप लग रहे हैं, वहीं नगर निगम कर्मियों ने आपसी सहयोग की मिसाल पेश की है. संगठन के मुताबिक कर्मचारियों ने अपने वेतन से लगभग 90 हजार रुपये की राशि एकत्र कर दीपक कुमार की माताजी को सौंपी है. संगठन का दावा है कि कर्मचारी लगातार परिवार की मदद कर रहे हैं.
48 घंटे का अल्टीमेटम
अखिल भारतीय मजदूर संगठन ने प्रशासन से तत्काल पीड़ित परिवार को मुआवजा देने, इलाज का पूरा खर्च वहन करने तथा परिवार को आर्थिक राहत प्रदान करने की मांग की है. संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटे के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो नगर आयुक्त, महापौर और जिला प्रशासन के खिलाफ श्रम न्यायालय में कानूनी वाद दायर किया जाएगा. संगठन का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण एक गरीब कर्मचारी का परिवार कर्ज और सूदखोरों के जाल में फंसने को मजबूर हुआ है.
संगठन का आरोप
मजदूर संगठन का कहना है कि नगर निगम प्रशासन को दैनिक एवं निम्न आय वर्ग के कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को लेकर गंभीरता दिखानी चाहिए. संगठन ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन और कानूनी लड़ाई दोनों तेज की जाएंगी.
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